UPI ट्रांजैक्शन चार्ज पर नया मोड़, संसदीय समिति में नहीं आया कोई प्रस्ताव; कांग्रेस ने किया दावा
कांग्रेस ने यूपीआई लेन-देन पर शुल्क के समर्थन संबंधी सरकारी दावों को भ्रामक बताया है। पार्टी सांसदों ने कहा कि ...और पढ़ें

कांग्रेस ने यूपीआई शुल्क पर सरकारी दावे को भ्रामक बताया।

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । यूपीआई लेन-देन पर लगाए गए शुल्क को वापस लेने की मांग कर रही कांग्रेस ने संसदीय स्थाई समिति में इस प्रस्ताव का उसके पार्टी सांसदों द्वारा विरोध न किए जाने वाले सरकारी दावे को भ्रामक और गलत बताते हुए खारिज किया है।
साथ ही पार्टी ने आरोप लगाया है कि यूपीआई लेन-देन पर टैक्स लगाने के मोदी सरकार के फैसले के भारी विरोध को देखते हुए ध्यान बंटाने के लिए सरकारी तंत्र झूठे प्रचार की दयनीय कोशिश कर रहा है।
वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति में शामिल कांग्रेस के सांसदों मनीष तिवारी और गौरव गोगोई ने भी इस दावे को झूठा बताते हुए कहा कि वित्त मंत्रालय के अधिकारी जब समिति के सदस्यों से चर्चा के लिए आए थे तो उनके पास यूपीआई पर टैक्स को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था।
यूपीआई के तहत दो हजार से अधिक की लेन-देन पर शुल्क लगाने के कांग्रेस के मुखर विरोध के मद्देनजर सरकारी सूत्रों के हवाले से गुरूवार को दावा किया गया कि संसदीय समिति ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) रेवेन्यू फ्रेमवर्क को बिना देरी के नोटिफाई कर इसे लागू करने की 12 अगस्त को रिपोर्ट स्वीकार की थी।
भाजपा और सरकार के सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट जब अनुमोदित किया गया तब पी चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के गोपीनाथ समेत कांग्रेस के पांच सांसद ने कोई असहमति दर्ज नहीं की थी।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने इन दावों को खारिज करते हुए एक्स पोस्ट में कहा ''संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति ने मोदी सरकार द्वारा हाल ही में घोषित यूपीआई टैक्स प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं की है।
जब वित्त विभाग के अधिकारी वित्त समिति के सदस्यों से मिले तो उनके पास यूपीआई टैक्स को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं था। एमडीआर की जरूरत पर सवाल उठाए गए लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों के पास कोई ठोस या संतोषजनक जवाब नहीं था।''
गोगोई ने कहा कि यूपीआई टैक्स की हालिया नीतियां भारत के छोटे व्यापारियों, वेंडरों और उद्यमियों को नुकसान पहुंचाती हैं और बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाती हैं इसलिए पीएम इसे वापस लें और घुटने टेकना बंद करें।
मनीष तिवारी ने भी गोगोई के पोस्ट से सहमति जताते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसदीय स्थायी समितियों की कार्यवाही जो गोपनीय और विशेषाधिकार प्राप्त होती है उसका इस्तेमाल अब सरकार अपनी वाहवाही बटोरने के लिए करना चाहती है।
गोगोई की बात बिल्कुल सही है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले एमडीआर के बारे में कोई ठोस प्रस्ताव जैसे कि रेट, मात्रा, फीस की रकम, अधिकतम सीमा और छूट के स्लैब आदि कभी भी वित्त समिति के सामने नहीं लाया गया। कई बैठकों में सदस्यों ने एमडीआर की जरूरत और प्रभावशीलता आदि को लेकर चिंताएं जताई थीं।
तिवारी ने कहा कि यह दावा करना कि 'कुछ सदस्यों' ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था यह संसदीय समिति की गोपनीय कार्यवाही का गलत और भ्रामक प्रचार है।
कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने तिवारी और गोगोई का समर्थन करते हुए कहा, ''अमेरिकी कंपनियों और डोनल्ड भाई को खुश करने के लिए यूपीआई टैक्स का फैसला लेने के बाद जो जबरदस्त विरोध हुआ, उससे ध्यान भटकाने के लिए मोदी सरकार ये घटिया कोशिशें कर रही है।''
