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'शनिवार तक इस्तीफा दें ज्ञानेश कुमार, नहीं तो 2 अक्टूबर से होगा प्रदर्शन', CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने दी चेतावनी

Published: Fri, 25 Sep 2026 03:57 PM (IST)

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से शनिवार तक इस्तीफा देने की मांग की है।

HighLights

  1. CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा मांगा

  2. इस्तीफा न देने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी

  3. मुंबई से शुरू होकर पूरे भारत में फैलेगा यह आंदोलन

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने शुक्रवार को कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफा नहीं देते हैं, तो पार्टी 2 अक्टूबर से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।

सोशल मीडिया प्लेलफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में, दीपके ने कहा कि CJP गांधी जयंती पर मुंबई से अपना विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी और बाद में इस आंदोलन को देशभर में ले जाएगी। आइए, इस गांधी जयंती पर लोकतंत्र को बचाने का संकल्प लें।'

दीपकेकी CEC को चेतावनी 

दीपके ने CEC के इस्तीफे पर चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे 'जंतर-मंतर 2.0' आंदोलन शुरू करेंगे। दीपके ने विपक्षी पार्टियों की भी आलोचना की कि वे चुनाव प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाने के बावजूद चुनाव लड़ते रहे।

उन्होंने कहा कि ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने से उन्हें वैधता मिलती है और एक भ्रम पैदा होता है कि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं।' उन्होंने कहा, 'हां, चुनावों में धांधली हो रही है। लेकिन जब आप धांधली वाले चुनावों में हिस्सा लेते रहते हैं, तो आप इन चुनावों को वैधता देते हैं और इस भ्रम को बनाए रखने में मदद करते हैं कि ये चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं।'

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विपक्षी पार्टियां इसलिए चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वे दूर रहीं तो उनका राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो जाएगा?

विपक्ष पर भी उठाया सवाल 

दीपके ने विपक्षी पार्टियों पर यह आरोप भी लगाया कि वे राज्य या शामिल राजनीतिक पार्टी के आधार पर, चुनिंदा तरीके से चुनावी गड़बड़ी के आरोप लगाती हैं। CJP के संस्थापक की ये बातें चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आई हैं।

हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार SIR प्रक्रिया में बदलाव से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।

इस पर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसलों समेत सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और उन्हें दोनों चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त ने मंजूरी दी थी।

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