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आतंकवाद, व्यापार, टैरिफ और युद्ध... ब्रिक्स का दिल्ली डिक्लेरेशन जारी, पहलगाम हमले की हुई निंदा

Published: Sat, 12 Sep 2026 05:53 PM (IST)Updated: Sat, 12 Sep 2026 06:06 PM (IST)

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा, व्यापार ...और पढ़ें

ब्रिक्स दिल्ली घोषणापत्र 2026 जारी (फोटो- रॉयटर्स)

ब्रिक्स दिल्ली घोषणापत्र 2026 जारी (फोटो- रॉयटर्स)

HighLights

  1. 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से मिली मंजूरी

  2. आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई

  3. नवीकरणीय ऊर्जा और व्यापार बाधाओं पर भी चर्चा हुई

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई है। पीएम मोदी ने BRICS के सदस्य देशों के सामने घोषणा का मसौदा रखा और पूछा कि क्या किसी देश को इस पर कोई आपत्ति है, किसी भी सदस्य देश ने आपत्ति नहीं जताई, जिसके बाद इसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया

इस घोषणापत्र का मुख्य फोकस नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग, एकतरफा व्यापारिक बाधाओं पर चिंता, आतंकवाद की रोकथाम और वैश्विक विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई दिल्ली घोषणा पत्र ने ब्रिक्स देशों के साझा संकल्प को आगे बढ़ाने की साफ दिशा तय कर दी है। अब असली जिम्मेदारी इन फैसलों को जमीन पर उतारने की है। उन्होंने कहा कि सिर्फ घोषणाएं करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें ठोस नतीजों में बदलना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस घोषणापत्र में संघर्ष की रोकथाम और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, मजबूत बहुपक्षवाद और एकतरफा व्यापार उपायों पर चिंताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

आतंकवाद पर कड़ा रुख

ब्रिक्स डिक्लेरेशन में सीमा पार आतंकवाद, टेरर फंडिंग और आतंकी पनाहगाहों सहित आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की गई है। शिखर सम्मेलन में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की गई।

सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ zero-tolerance नीति अपनाने, दोषियों की जवाबदेही तय करने और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र के व्यापक सम्मेलन (CCIT) को जल्द से जल्द पारित करने का आह्वान किया।

दिल्ली डिक्लेरेशन की महत्वपूर्ण बातें

BRICS देशों ने जंग और टकराव रोकने की कोशिशों को तेज करने की जरूरत बताई।

सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत, आपसी सलाह और कूटनीति के जरिए करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से आपसी बातचीत, सलाह और कूटनीति के ज़रिए ही निकाला जाना चाहिए।

घोषणापत्र में पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई।

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