'दोहरे मापदंड नहीं चलेंगे', BRICS संसदीय मंच ने की सीमापार आतंकवाद की निंदा
ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमले सहित सभी आतंकी घटनाओं की निंदा की और पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता व्यक्त की।

ब्रिक्स ने पहलगाम हमले सहित सभी आतंकी घटनाओं की निंदा की

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ब्रिक्स देशों ने पहलगाम हमला समेत सभी आतंकी घटनाओं की कड़ी निंदा करते हुए पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता जताई और संबंधित पक्षों से संयम बरतने का आग्रह किया।
नई दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच की बैठक के समापन पर संयुक्त घोषणा पत्र के जरिए स्पष्ट संदेश देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी व्यापक सुधार, फलस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की भी अपील की गई।
ब्रिक्स ने सभी आतंकी घटनाओं की निंदा की
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और आतंक के सभी रूपों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करनी होगी।
पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। संयुक्त घोषणा पत्र में कहा गया कि आतंकवाद को किसी भी उद्देश्य, स्थान या परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद के वित्तपोषण और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने जैसी गतिविधियों के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि आतंक को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
ओम बिरला ने कहा कि वैश्विक शांति का वास्तविक अर्थ सभी के लिए सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करना है। दुनिया की समस्याओं का स्थायी समाधान संघर्ष में नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग में है। बिरला ने संसदों को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने तथा एआइ के इस्तेमाल में नैतिकता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता जताई
ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन किया। घोषणा पत्र में कहा गया कि सुधारों के जरिए इस संस्था को अधिक न्यायसंगत, लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण एवं प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि उसमें मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों एवं अंतरराष्ट्रीय समुदायों का निष्पक्ष प्रतिबिंब दिखाई दे।
मंच ने सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के साथ अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को वैश्विक स्थिरता का आधार बताते हुए एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और दूसरे देशों पर दबाव बनाने वाली मंशा की भी निंदा की गई। संयुक्त रूप से कहा गया कि ऐसे उपाय मानवाधिकारों, विकास के अधिकार, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए मंच ने संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है। घोषणा पत्र में इजरायल-फलस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो-राष्ट्र व्यवस्था का समर्थन दोहराया गया।
इसके तहत इजरायल और फलस्तीन के स्वतंत्र राष्ट्रों के शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित सह-अस्तित्व की बात कही गई। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने और पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों के अनुरूप प्रयास तेज करने की अपील की गई।
