'विदेशी होकर SIR के खिलाफ कैसे दिया धरना?', ध्रुव राठी के खिलाफ गृह मंत्रालय से जांच की मांग
बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने यूट्यूबर ध्रुव राठी की एसआईआर विरोधी प्रदर्शन में भागीदारी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय से जांच की मांग की है।

ध्रुव राठी के एसआईआर विरोधी प्रदर्शन में भागीदारी पर गृह मंत्रालय से जांच की मांग (फोटो- PTI)
HighLights
भास्कर राव ने ध्रुव राठी के खिलाफ गृह मंत्रालय से जांच मांगी।
ध्रुव राठी ने बेंगलुरु में एसआईआर विरोधी प्रदर्शन में भाग लिया।
उनकी नागरिकता, वीजा शर्तों के अनुपालन पर सवाल उठे।
डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त भास्कर राव ने यहां एसआईआर विरोधी प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी की भागीदारी के बाद उनकी नागरिकता, आव्रजन स्थिति और वीजा शर्तों के अनुपालन की जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है।
केंद्रीय गृह सचिव को लिखे पत्र में राव ने कहा कि जर्मनी की नागरिकता रखने वाले राठी ने अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज और अन्य लोगों के साथ प्रदर्शन में हिस्सा लिया और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भारतीय निर्वाचन आयोग की आलोचना की।
चामराजपेट से भाजपा के टिकट पर 2023 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव हारने वाले राव ने अपने एक्स हैंडल पर साझा पत्र में कहा, 'सीमित और विशिष्ट मुद्दा, जिसकी जांच जरूरी है, यह है कि क्या किसी खास वीजा, आव्रजन अनुमति या अन्य स्थिति के आधार पर भारत में रह रहा कोई विदेशी नागरिक, भारत के संवैधानिक संस्थानों के कामकाज से जुड़े किसी संगठित राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने, उसे संबोधित करने या किसी अन्य तरीके से उससे जुड़ने का कानूनी अधिकार रखता है।'
उन्होंने कहा कि अगर विदेशी अधिनियम, 1946, वीजा शर्तों, आव्रजन नियमों, ओसीआइ नियमों या अन्य लागू कानूनों का कोई उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने मंत्रालय से राठी की मौजूदा नागरिकता और राष्ट्रीयता, भारत में प्रवेश के लिए इस्तेमाल किए गए पासपोर्ट, देश में रहने के लिए जारी वीजा या अन्य अनुमति की श्रेणी, यात्रा के घोषित उद्देश्य और अधिकृत प्रवास से जुड़ी शर्तों की पुष्टि करने का आग्रह किया।
उन्होंने यह जांच करने की भी मांग की कि क्या लागू आव्रजन और वीजा नियमों के तहत राठी का बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एसआईआर के विरोध में नागरिक समाज संगठनों और सीजेपी की ओर से आयोजित ‘पीपुल्स ट्रिब्यूनल’ नाम के प्रदर्शन में शामिल होना और उसे संबोधित करने और क्या इसके लिए पहले से अनुमति या मंजूरी जरूरी थी। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
