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बेंगलुरु में ट्रैफिक से बुरा हाल, 2.5 घंटे में तय हो रहा 4 KM का सफर; एग्जाम देने जा रहे बच्चे फंसे

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:46 AM (IST)

बेंगलुरु में भयंकर ट्रैफिक जाम से स्कूली बच्चे और अभिभावक परेशान हैं। 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में ढाई घंटे लग रहे हैं।

HighLights

  1. स्कूली बच्चे 40 मिनट तक लेट हुए, घंटों जाम में फंसे।

  2. 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में ढाई घंटे का समय।

  3. खराब सड़कें, गड्ढे और ट्रैफिक कुप्रबंधन मुख्य समस्या।

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। बेंगलुरु में एसएच-35 के वरथुर-गुंजूर मार्ग पर सफर करने वाले सैकड़ों स्कूली बच्चों के लिए गुरुवार का दिन बेहद परेशानी भरा रहा। भयंकर ट्रैफिक जाम के कारण सुबह स्कूल बसें 40 मिनट तक लेट हो गईं, वहीं स्कूल से लौटते समय बच्चे घंटों तक सड़कों पर फंसे रहे। स्थिति इतनी खराब थी कि महज 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को ढाई घंटे तक का समय लग गया।

इस मार्ग के आसपास 18-20 बड़े स्कूल हैं, और इनमें से कई स्कूलों में इन दिनों मिड-टर्म परीक्षाएं चल रही हैं। अभिभावकों ने बताया कि पिकअप पॉइंट पर बसें देरी से पहुंचने और रास्ते में जाम में फंसने के कारण बच्चे काफी घबराए हुए परीक्षा हॉल पहुंचे।

शाम को घर वापसी का सफर और भी बुरा रहा। कई छात्रों को घर पहुंचने में डेढ़ घंटे से भी ज्यादा का अतिरिक्त समय लगा। हालांकि, राहत की बात यह रही कि कुछ स्कूलों ने जाम से प्रभावित छात्रों की परेशानी को समझते हुए उन्हें परीक्षा पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया।

टूटी सड़कों, बड़े गड्ढों और ट्रैफिक कुप्रबंधन बनी समस्या

SH-35 का वरथुर-गुंजूर हिस्सा वर्तमान में कर्नाटक सड़क विकास निगम द्वारा किए जा रहे इन्फ्रास्ट्रक्चर के कार्यों के अधीन है। हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस कॉरिडोर पर लगातार संकरे रास्तों, टूटी सड़कों, बड़े गड्ढों और ट्रैफिक कुप्रबंधन की समस्या बनी हुई है, जिससे रोजाना का सफर अनिश्चित हो गया है।

कैंडोर लैंडमार्क अपार्टमेंट की निवासी प्रीति सिंह ने कहा कि सबसे बड़ी चिंता स्कूलों में चल रही परीक्षाओं की थी। उन्होंने कहा कि यह बात अविश्वसनीय है कि शहर की अर्थव्यवस्था में इतना बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र इतने खराब बुनियादी ढांचे से जूझ रहा है।

ट्रैफिक में बीत रहा क्लासरूम से ज्यादा समय

स्थानीय निवासी पवित्रा होला ने बताया कि बच्चे क्लासरूम से ज्यादा समय ट्रैफिक में बिता रहे हैं। उन्होंने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि आज कुछ बच्चों को स्कूल से केवल 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगभग ढाई घंटे लग गए।

बच्चे बुरी तरह थक चुके हैं, माता-पिता चिंतित हैं, और इस समस्या का कोई अंत नजर नहीं आ रहा है। सड़कें ठीक नहीं हैं, स्कूल के समय भी भारी वाहन चलते हैं, ट्रैफिक मैनेजमेंट नदारद है और बुनियादी सुविधाएं गायब हैं।

बच्चे घंटों तक धूल और जाम के बीच बैठे रहने को मजबूर हैं। होला ने यह भी जोड़ा कि इलाके में ट्रैफिक जाम एक पुरानी समस्या है, लेकिन पिछले दो हफ्तों में हालात बद से बदतर हो गए हैं।

बसों का इंतजार छोड़ दोपहिया वाहनों का सहारा

हालात इतने बिगड़ गए कि कुछ अभिभावकों के पास स्कूल बस का विचार छोड़कर खुद बच्चों को स्कूल छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। कैंडोर लैंडमार्क की ही एक अन्य निवासी स्वाति कुमारी ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे की स्कूल बस का लगभग 45 मिनट तक इंतजार किया, और फिर मजबूरन उसे दोपहिया वाहन पर छोड़ने का फैसला किया।

स्वाति ने कहा कि मेरे बेटे का स्कूल घर से 2 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। वैसे तो उसकी छुट्टी दोपहर 2:45 बजे हो जाती है, लेकिन पिछले एक महीने से वह शाम 4:30 बजे के आसपास घर पहुंच रहा है। स्कूटर से महज 1 किलोमीटर की दूरी तय करने में मुझे एक घंटे से ज्यादा का समय लग गया।

इस सफर को असुरक्षित बताते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई सड़क दुर्घटनाओं और रास्तों की खराब स्थिति को देखते हुए माता-पिता अपने छोटे बच्चों को दोपहिया वाहनों पर ले जाने से भी घबराने लगे हैं।

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