विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

असम: नेशनल कराटे में गोल्ड जीतने वाली लड़की का परिवार टेंट में रहने को मजबूर, बाढ़ में उजड़ गया घर

Published: Tue, 11 Aug 2026 11:29 AM (IST)Updated: Tue, 11 Aug 2026 11:39 AM (IST)

17 वर्षीय जनमोनी कुंवर ने नेशनल कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता, जबकि उनका परिवार बाढ़ में घर उजड़ने के बाद टेंट में रह रहा है।

नेशनल कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली जनमोनी कुंवर(फोटो: सोशल मीडिया)

नेशनल कराटे चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली जनमोनी कुंवर(फोटो: सोशल मीडिया)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, दिसपुर। नई दिल्ली में आयोजित नेशनल कराटे चैंपियनशिप में 17 वर्षीय जनमोनी कुंवर ने स्वर्ण पदक जीता है। सोमवार को जब वह अपने घर लौटीं, जहां उनका परिवार अभी भी टेंट में रह रहा है, क्योंकि पिछले महीने आई विनाशकारी बाढ़ में उनका घर बह गया था।

जोरहाट जिले के भोगदोईपोरिया गांव की रहने वाली जनमोनी ने 7 से 9 अगस्त तक तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित चैंपियनशिप की अशीहारा श्रेणी में स्वर्ण पदक अपने नाम किया है।

बाढ़ से उजड़ा आशियाना

19 जुलाई को इलाके में बाढ़ का पानी घुसने के बाद उनके परिवार को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उनके घर से करीब 150 मीटर दूर स्थित तटबंध टूट गया, जिससे गांव में पानी भर गया और परिवार की मछली पालन की जगह पूरी तरह तबाह हो गई। बत्तखें और मुर्गियां पानी में बह गईं, जबकि परिवार की भैंसों को किसी तरह सुरक्षित स्थान पर ले जाना पड़ा।

यह मछली पालन जनमोनी के चैंपियनशिप में भाग लेने से भी जुड़ा हुआ था। उनका परिवार लगभग तीन साल से मछलियां पाल रहा था और उन्होंने जनमोनी की दिल्ली यात्रा का खर्च उठाने के लिए इन्हें बेचने की योजना बनाई थी।

जनमोनी के बड़े भाई कृष्णामोनी कुंवर ने कहा कि हमने मछलियां बेचकर जनमोनी को प्रतियोगिता में भेजने की योजना बनाई थी, लेकिन बाढ़ ने उस योजना को तबाह कर दिया।

कराटे के लिए बेच दी थीं भैंसें

परिवार ने जनमोनी की कराटे प्रतियोगिताओं में भागीदारी का खर्च उठाने में मदद करने के लिए पहले अपनी दो भैंसें भी बेच दी थीं। जनमोनी ने महज पांच साल की उम्र में कराटे सीखना शुरू कर दिया था।

सीमित प्रशिक्षण सुविधाओं के बावजूद, उन्होंने इस खेल को जारी रखा और 2023 में कांस्य व 2025 में स्वर्ण पदक जीता। वह इस साल की राष्ट्रीय चैंपियनशिप की तैयारी कर रही थीं, जब इलाके में बाढ़ आ गई।

परिवार के विस्थापित होने और रेल सेवाएं प्रभावित होने के कारण, जनमोनी को दिल्ली भेजना एक बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे में असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर आए एक कंपनी के संस्थापक को जनमोनी की स्थिति के बारे में पता चला, तो उन्होंने मदद का हाथ बढ़ाया।

उनके टीम के दिल्ली जाने, आने और रहने का खर्च उठाया। वहीं, जनमोनी के परिवार को 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी। वहीं, केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भी 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। मदद मिलने के बाद अंततः जनमोनी ने दिल्ली पहुंची और चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक के साथ वापस लौटीं।

तटबंध पर भी जारी रखा अभ्यास

परिवार के तटबंध पर विस्थापित होने के बाद भी जनमोनी का प्रशिक्षण नहीं रुका। बिना किसी उचित प्रशिक्षण सुविधा के, उन्होंने अपना अभ्यास तब भी जारी रखा जब उनका परिवार अपने घर और आजीविका के नुकसान से जूझ रहा था। सोमवार को जनमोनी डिब्रूगढ़ हवाईअड्डे पर पहुंचीं और अपना मेडल लेकर सीधे अपने बाढ़ प्रभावित गांव की ओर लौट गईं।

इस बीच, उनका परिवार अभी भी तटबंध पर ही रह रहा है। कृष्णामोनी के अनुसार, घर लौटने के बारे में सोचने से पहले उन्हें शायद नवंबर तक वहीं रहना पड़ सकता है।

12वीं कक्षा की छात्रा जनमोनी अब अपना कराटे करियर जारी रखना चाहती हैं। परिवार के लिए, उनकी बेटी का यह राष्ट्रीय स्वर्ण एक बेहद कठिन समय में आया है, जब वे बाढ़ की तबाही से उबरने की एक लंबी प्रक्रिया की शुरुआत कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें- असम में बाढ़ का कहर जारी, दो और लोगों की मौत; मृतकों की संख्या 100 हुई

यह भी पढ़ें- असम के बाढ़ प्रभावित जोरहाट जिले में नीरी जार वाटर प्यूरीफायर बनी उम्मीद