असम के बाढ़ प्रभावित जोरहाट जिले में नीरी जार वाटर प्यूरीफायर बनी उम्मीद
असम के बाढ़ प्रभावित जोरहाट जिले में पीने के पानी की कमी को दूर करने के लिए CSIR-NEERI द्वारा विकसित 'नीरी-जार' वाटर प्यूरीफायर उम्मीद बनकर आया है।

असम में बाढ़ से प्रभावित जोरहाट। (एएनआई)
HighLights
जोरहाट में बाढ़ के कारण पीने के पानी की कमी।
CSIR-NEERI का 'नीरी-जार' वाटर प्यूरीफायर बना समाधान।
कुल 100 इकाइयां वितरित, परिवारों और समुदायों को लाभ।
डिजिटल डेस्क, जोरहाट। असम के बाढ़ प्रभावित जोरहाट जिले में पीने का पानी सोने के बराबर कीमती है। लोगों की मदद के लिए 'नीरी-जार' आया है, जो सीएसआइआर के राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित गुरुत्वाकर्षण आधारित, शून्य-ऊर्जा वाला वाटर प्यूरीफायर है।
शनिवार को जिले में वाटर प्यूरीफायर प्रणाली की कुल 100 इकाइयां वितरित की गईं, जिनमें से 75 एकल परिवारों के लिए और शेष बड़े समुदायों के लिए थीं।
इस परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया, “आज हमने तिताबोर ब्लॉक के जोनाकीमंडल गांव में घरेलू और सामुदायिक इकाइयों की पांच-पांच इकाइयां सौंपीं। शेष 90 इकाइयां जोरहाट जिला आयुक्त को सौंप दी गईं। उनका कार्यालय आगे के वितरण को सुनिश्चित करेगा।”
एक छोटे परिवार के लिए दो 22-लीटर के बर्तनों वाला वाटर प्यूरीफायर पीने और खाना पकाने के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन छह से 10 लीटर पानी की आवश्यकता के अनुमान के आधार पर, दिन में एक घंटे के संचालन पर पांच से छह लोगों की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
दो 100 लीटर के बर्तनों वाला एक सामुदायिक स्तर का वाटर प्यूरीफायर लगभग 10 घरों की पीने और खाना पकाने के पानी की जरूरतों को पूरा कर सकता है। अधिकारियों ने कहा कि बाढ़ जैसी आपात स्थितियों में ये प्रणालियां बहुत उपयोगी साबित होती हैं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
