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सुबह 6 बजे से ही मिलने का अपॉइंटमेंट देते थे 'दादा', तंबाकू-गुटखा और शराब से थी सख्त नफरत

Published: Wed, 28 Jan 2026 01:50 PM (IST)

महाराष्ट्र के दिग्गज नेता अजित पवार अपनी अनुशासित कार्यशैली के लिए जाने जाते थे, जहाँ वे सुबह छह बजे से ...और पढ़ें

अजित पवार तंबाकू, गुटखा, पान इत्यादि खानेवालों को वह सार्वजनिक रूप से भी लताड़ने से नहीं चूकते थे।

अजित पवार तंबाकू, गुटखा, पान इत्यादि खानेवालों को वह सार्वजनिक रूप से भी लताड़ने से नहीं चूकते थे।

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राज्य ब्यूरो, मुंबई। देश में कम ही राजनेता होंगे, जो स्वयं सुबह छह बजे कामकाज के लिए तैयार हो जाते हों और कार्यकर्ताओं व अधिकारियों को भी सुबह छह बजे से ही मिलने का अपाइंटमेंट देना शुरू कर देते हों। लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से मशहूर अजित पवार अपनी इसी विशेषता के लिए जाने जाते थे।

हाल ही में हुए नगर परिषद चुनाव में पुनः बारामती के नगराध्यक्ष चुने गए सचिन सातव कहते हैं कि दादा जब बारामती में होते थे, तो सुबह से ही नगर के किसी न किसी कोने में हो रहे विकास कार्यों का जायजा लेने पहुंच जाते थे। यही कारण था कि इन कार्यों में लगे लोग भी समय पर पहुंचकर काम में लग जाते थे।

यही स्थिति मुंबई में उनके सरकारी आवास पर भी रहती थी। वह खुद सुबह छह बजे तैयार हो जाते थे और उनके विभाग के अधिकारी भी सुबह-सुबह ही तैयार होकर बैठ जाते थे कि न जाने कब उपमुख्यमंत्री जी का बुलावा आ जाए और उनके बंगले पर जाना पड़े।

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ग्रामीण राजनीति पर मजबूत पकड़

विभिन्न मुख्यमंत्रियों के साथ छह बार उपमुख्यमंत्री रह चुके अजित पवार न सिर्फ राजकोषीय नीतियों के अद्भुत जानकार थे, बल्कि ग्रामीण विकास की भी नस-नस से परिचित थे। कई सरकारों में वित्तमंत्री रहने के कारण उन्हें इस बात की पूरी जानकारी थी कि किस मद में कितना पैसा खर्च किया जाना उचित होगा।

उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1982 में एक सहकारी चीनी मिल के बोर्ड सदस्य के रूप में की और महाराष्ट्र के सहकारी बैंक क्षेत्र में भी उनका गहरा दखल रहा, इसलिए उन्हें सहकारिता क्षेत्र का भी अच्छा जानकार माना जाता था। उनकी इस विशेषता की ओर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह भी इंगित कर चुके हैं।

माना जा रहा था कि 2023 में अजित पवार को शिंदे सरकार में शामिल करने के पीछे यह रणनीति भी रही होगी कि अजित पवार के माध्यम से भाजपा को सहकारिता क्षेत्र के करीब लाया जा सके।

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नशे के सख्त खिलाफ थे 'दादा'

स्वयं किसी भी तरह के नशे से दूर रहे अजित पवार को नशा करने वाले लोग भी पसंद नहीं थे। अपने चाचा शरद पवार को हुए मुख कैंसर ने वह अपनी नशा विरोधी धारणा को लेकर और दृढ़ हो गए थे। तंबाकू, गुटखा, पान इत्यादि खानेवालों को वह सार्वजनिक रूप से भी लताड़ने से नहीं चूकते थे।

महाराष्ट्र के पूर्व गृह एवं उपमुख्यमंत्री रह चुके स्वर्गीय आर.आर.पाटिल को भी कैंसर के कारण ही अपनी जान गंवानी पड़ी थी। पाटिल की यह बीमारी सामने आने से पहले अजित पवार उम्र में पाटिल से कम होने के बावजूद उन्हें कई बार उनकी तंबाकू की लत को लेकर कई लोगों के सामने झिड़क चुके थे।

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