नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल ]। पाकिस्‍तान की वजह से भारतीय एयरलाइंस को हर रोज छह से दस करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। 26 फरवरी से लेकर अब तक विमानन कंपनियों को 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा है। इसकी वजह भारत से गुजरने वाले विमानों के लिए पाकिस्‍तान के एयर स्‍पेस का बंद होना है। दरअसल, 14 फरवरी 2019 को जैश ए मुहम्‍मद के आत्‍मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट स्थित आतंकियों के कैंपों और ठिकानों पर हमला कर उन्‍हें बर्बाद कर दिया था। इसके तुरंत बाद पाकिस्‍तान ने अपना एयर स्‍पेस भारत की तरफ आने या जाने वाले विमानों के लिए बंद कर दिया था।

इन उड़ानों पर असर
इसका सीधा असर भारत से पश्चिमी देशों की तरफ जाने वाले विमानों पर पड़ा है। दरअसल, इस फैसले से पहले भारतीय विमान पाकिस्‍तान के एयर स्‍पेस का इस्‍तेमाल करते थे। इसकी वजह थी कि यहां से होकर जाने में एयरलाइंस को ईंधन और समय की बचत हुआ करती थी। खासतौर पर यूरोपीय देशों में जाने वाले विमानों के लिए यह मार्ग सबसे सही था। लेकिन पाकिस्‍तान के एयर स्‍पेस बंद करने के बाद विमानों को वै‍कल्पिक मार्ग से जाना पड़ रहा है। इसकी वजह से ईंधन और समय दोनों ही अधिक लग रहा है।

बढ़ सकता है नुकसान
मई की शुरुआत में यदि एयर लाइंस को इससे होने वाले नुकसान का आंकलन करें तो यह पिछले दो माह से कहीं ज्‍यादा होने वाला है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि पिछले माह विमान का ईंधन या एयर फ्यूल की कीमत 668 डॉलर प्रति किलो लीटर थी, वहीं अब मई में यह 700 रुपये प्रति किलो लीटर हो गई है। ऐसे में विमानन कंपनियों का नुकसान बढ़ने की पूरी आशंका बनी हुई है। ऐसे में यदि पाकिस्‍तान ने अपना एयर स्‍पेस जल्‍द नहीं खोला तो एयरलाइंस कंपनियों को घाटे से उबरने के लिए नई रणनीति पर काम करना जरूरी हो जाएगा।

अमे‍रिका के फैसले का असर
वर्तमान में यदि तेल की कीमतों की बात करें तो यह इसलिए भी चिंता का विषय है क्‍योंकि ईरान से तेल सौदे को लेकर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिए हैं। इसके चलते अब भारत तेल खरीद के लिए सऊदी अरब और इराक पर नजरें लगाए हुए है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि अमेरिकी आदेश से पहले ईरान के लिए चीन पहले और भारत दूसरे नंबर पर तेल का सबसे बड़ा खरीददार था। लेकिन, अमेरिकी फैसले के बाद भारत की तरह चीन को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान से हमारी जरूरत का करीब 70 फीसद तेल आता था।

परेशानी का सबब
तेल की बढ़ती कीमत और पाकिस्‍तान के एयर स्‍पेस का बंद होना, दोनों ही फिलहाल एयरलाइंस कंपनियों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। पाकिस्तानी एयर स्पेस के बंद होने का खामियाजा हर रोज 400 उड़ानों को भुगतना पड़ रहा है। वर्तमान में यूरोप या अमेरिका जाने वाले विमान ओमान के रास्ते उड़ान भर रहे हैं। इसके अलावा ईरान एयर कॉरिडोर में भी पहले से अधिक विमान उड़ रहे हैं। पाकिस्‍तान द्वारा लिए गए फैसले का सबसे अधिक खामियाजा लंदन जाने वाले यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं लंदन से सिंगापुर जाने वाले विमानों के लिए यह दूरी करीब साढ़े चार सौ किमी बढ़ गई है। इसके अलावा हैदराबाद से लंदन जाने वाले विमानों को करीब 10-15 घंटे का समय लग रहा है।

एयर स्‍ट्राइक से पहले
आपको बता दें कि एयर स्ट्राइक से पहले दिल्ली से यूरोप जाने वाली उड़ानें पाक की हवाई सीमा के ऊपर से गुजरती थीं। रॉयटर्स के मुताबिक 19-26 फरवरी और 3-9 अप्रैल के बीच दिल्ली से एम्सटर्डम के बीच औसत एक फ्लाइट को 913 किमी ज्यादा दूरी तय करनी पड़ रही है। इस वजह से औसतन हर फ्लाइट्स दो घंटे ज्यादा देरी से चल रही हैं।

इन पर पड़ा असर
आपको यहां पर ये भी बता दें कि एयर इंडिया एकमात्र एयरलाइन है, जो यूरोप तथा अमेरिका के लिए उड़ान भरती है, लिहाजा पाकिस्तान के प्रतिबंध का सबसे ज्यादा असर इसी पर पड़ा है। पाकिस्‍तान का एयर स्‍पेस बंद होने की वजह से इस दूरी में तीन घंटे से अधिक का समय लग रहा है। प्रतिबंध की वजह से एयर इंडिया को अतिरक्त खर्च और उड़ानें रद्द से 372 करोड़ रुपये का चूना पहले ही लग चुका है। कंपनी को हर दिन छह करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इतना ही नहीं इसमें समय और ईंधन की बर्बादी इस वजह से भी हो रही है क्‍योंकि इतनी लंबी उड़ान के लिए विमानों को बीच में उतरकर ईंधन लेना पड़ता है।

समय और ईंधन की खपत बढ़ी
यही हाल दिल्ली से इस्तांबुल जाने वाले इंडिगो के विमानों के साथ भी है। इस रूट पर उड़ान भरने वाले विमानों को तेल भरवाने के लिए दोहा और अहमदाबाद में रुकना पड़ रहा है। इसके चलते कंपनी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस परेशानी की वजह से दिल्ली से काबुल के बीच जाने वाली कुछ उड़ानों को रद करना पड़ा है। पाकिस्तानी प्रतिबंध के कारण सिंगापुर एयलाइंस, फिनएयर, ब्रिटिश एयरवेज, एयरोफ्लोत और थाइ एयरवेज जैसी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को अपने रूट में परिवर्तन करना पड़ा है।

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Posted By: Kamal Verma

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