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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 14, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

...अब काबुल नदी के जरिए पाकिस्तान को घेरने की तैयारी में भारत

By Lalit RaiEdited By:
Published: Fri, 14 Oct 2016 12:05 PM (IST)Updated: Fri, 14 Oct 2016 01:13 PM (IST)

अफगानिस्तान और भारत काबुल नदी तंत्र के विकास के लिए एक दूसरे के करीब आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे पाकिस्तान की परेशानी बढ़ेगी।

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नई दिल्ली(जेएनएन)। उड़ी हमले के तुरंत बाद भारत ने साफ कर दिया कि शहीदों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी। उड़ी के गुनहगारों को सजा जरूर मिलेगी। भारत ने अपने इरादे को बढ़ाते हुए सिंधु जल समझौते की समीक्षा की।भारत की तरफ से सिंधु जल समझौते को तोड़े जाने के संकेत के बाद पाकिस्तान बौखला गया। पाकिस्तान की तरफ से ये बयान आने लगा कि भारत एकतरफा कार्रवाई नहीं कर सकता है। लेकिन अफगानिस्तान द्वारा अपने पूर्वी नदी तंत्र( काबुल, कुंद्रा और चित्राल) के विकास की योजना में भारत को सहयोगी बनाए जाने की खबर के बाद पाक परेशान है।

काबुल के जरिए पाक को रोकने की तैयारी

काबुल नदी तंत्र और चेनाब नदी तंत्र में समानताएं हैं। अफगानिस्तान रन ऑफ रिवर के सिद्वांत पर काबुल नदी प्रणाली का विकास कर सकता है। अफगानिस्तान द्वारा सिंचाई और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के विकास के लिए किसी तरह की अंतरराष्ट्रीय अड़चन भी नहीं है। काबुल नदी के पानी के समुचित उपयोग न होने से पाकिस्तान को ज्यादा फायदा होता है।

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काबुल का विकास, पाक में विनाश

जानकारों का कहना है कि काबुल नदी तंत्र के विकास से पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान होगा। पाकिस्तान बार-बार अफगानिस्तान के अलावा दूसरे देशों से मदद नहीं करने की अपील कर रहा है। पिछले महीने अफगान राष्ट्रपति अशरफ घानी ने भारत से काबुल नदी के विकास में मदद करने की अपील की थी। भारत और अफगानिस्तान के बीच इन मुद्दों पर बातचीत चल रही है।

अशरफ घानी भारत का करेंगे दौरा

दिसबंर में अमृतसर में हॉर्ट ऑफ एशिया मिनिस्ट्रीयल सम्मेलन में अशरफ घानी शिरकत करेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम नरेंद्र मोदी भी इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे। अफगानिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि काबुल नदी के विकास से पूर्वी प्रांतों नांगरहार पख्तिया और खोश्त में खुशहाली आएगी। पाक स्थित आतंकियों द्वारा तमाम अड़चनों के बावजूद सलमा डैम और जरांज डेलाराम प्रोजेक्ट को भारत सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है।

चेनाब पर रुके प्रोजेक्ट्स होंगे शुरू

उड़ी हमले के तुरंत बाद भारत ने चेनाब नदी पर रुके हुए तीन प्रोजेक्ट्स पर काम को दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। इससे पहले इंडस वाटर ट्रीटी और पाकिस्तान के विरोध के बाद भारत ने इन प्रोजेक्ट्स पर काम को रोक दिया था। जानकारों का मानना है कि चेनाब की तरह काबुल नदी के विकास से पाकिस्तान के खाते में दिक्कते ही आएंगी। पाकिस्तान कहता भी रहा है कि अगर अफगानिस्तान किसी बाहरी मदद से काबुल नदी तंत्र का विकास करता है तो वो बिजली खरीदना बंद कर देगा।

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