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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

4.77 लाख करोड़ रुपये बढ़ी 412 परियोजनाओं की लागत, 830 प्रोजेक्ट में देरी; मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा

By AgencyEdited By: Mohd Faisal
Published: Sun, 24 Sep 2023 07:03 PM (IST)

बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 412 परियोजनाओं की लागत इस साल अगस्त ...और पढ़ें

4.77 लाख करोड़ रुपये बढ़ी 412 परियोजनाओं की लागत, 830 प्रोजेक्ट में देरी; मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा (फाइल फोटो)
4.77 लाख करोड़ रुपये बढ़ी 412 परियोजनाओं की लागत, 830 प्रोजेक्ट में देरी; मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा (फाइल फोटो)

HighLights

  1. परियोजनाओं के क्रियान्वयन की मूल लागत बढ़ी।
  2. सांख्यिककी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा।
  3. देरी से चल रहे 830 प्रोजेक्ट।

नई दिल्ली, पीटीआई। बुनियादी ढांचा क्षेत्र की 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक के खर्च वाली 412 परियोजनाओं की लागत इस साल अगस्त तक तय अनुमान से 4.77 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बढ़ गई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देरी और अन्य कारणों से इन परियोजनाओं की लागत बढ़ी है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय रखता है नजर

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय 150 करोड़ रुपये या इससे अधिक की लागत वाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करता है। मंत्रालय की अगस्त, 2023 की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह की 1,762 परियोजनाओं में से 412 की लागत बढ़ गई है, जबकि 830 अन्य परियोजनाएं देरी से चल रही हैं।

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परियोजनाओं के क्रियान्वयन की मूल लागत बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार, 'इन 1,762 परियोजनाओं के क्रियान्वयन की मूल लागत 25,01,400.62 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब इसके बढ़कर 29,78,681.31 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है। इससे पता चलता है कि इन परियोजनाओं की लागत 19.08 प्रतिशत यानी 4,77,280.69 करोड़ रुपये बढ़ गई है।'

2023 तक परियोजनाओं पर खर्च हुए इतने करोड़ रुपये

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त, 2023 तक इन परियोजनाओं पर 15,57,188.10 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जो कुल अनुमानित लागत का 52.28 प्रतिशत है। हालांकि, मंत्रालय ने कहा है कि यदि परियोजनाओं के पूरा होने की हालिया समयसीमा के हिसाब से देखें तो देरी से चल रही परियोजनाओं की संख्या कम होकर 624 पर आ जाएगी। रिपोर्ट में 339 परियोजनाओं के चालू होने के साल की जानकारी नहीं दी गई है।

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