नई दिल्ली, प्रेट्र। आतंकी हिंसा से जूझ रहे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को ऑपरेशन आलआउट के दौरान दहशतगर्दो के सफाए के काम में अपार सफलता मिली है। घाटी में इस साल 10 दिसंबर तक 203 खूंखार आतंकवादी मारे गए हैं। यह संख्या पिछले चार वर्षो में सबसे ज्यादा है। इस दौरान सुरक्षा बलों के 75 जवान भी शहीद हुए। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी गई।

गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर में इस साल दस दिसंबर तक आतंकी हिंसा में करीब 318 लोग मारे गए। इनमें 203 आतंकी व सुरक्षा बलों के 75 जवान भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 150 दहशतगर्दो को ही मार गिराया गया था। वर्ष 2015 में यह संख्या 108 और 2014 में 110 थी।

अहीर के अनुसार, इस अवधि के दौरान राज्य में आतंकी हिंसा की कुल 337 घटनाएं हुई। इनमें 40 नागरिकों की भी मौत हुई है। आतंकी हिंसा की घटनाओं में करीब 321 लोग घायल हुए। सुरक्षा बलों ने इस दौरान 91 आतंकवादियों को पकड़ा।

111 नक्सली भी मारे गए

नक्सली हिंसा की चर्चा करते हुए हंसराज अहीर का कहना था कि इस वर्ष 30 नवंबर तक देश में उग्र वामपंथी हिंसा की 813 घटनाएं दर्ज की गई। इनमें 170 नागरिकों की मौत हुई। इस हिंसा में सुरक्षा बलों के 75 जवान भी शहीद हुए। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 111 नक्सली मारे गए। अपने जवाब में गृह राज्यमंत्री ने पूर्वोत्तर की उग्रवादी हिंसा का भी विस्तृत ब्योरा दिया। उनका कहना था कि पूर्वोत्तर के राज्यों में इस वर्ष 51 दहशतगर्द सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए, जबकि 11 जवानों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

पाक ने 881 बार किया संघर्ष विराम का उल्लंघन

एक अन्य सवाल के जवाब में अहीर ने बताया कि इस वर्ष नवंबर तक पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर में 881 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया। इस दौरान सीमापार से फायरिंग में 30 लोगों की जान गई। इनमें सुरक्षा बलों 18 जवान शहीद हो गए।

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