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होर्मुज में अभी भी फंसे हैं 13 भारतीय जहाज, 'पीस डील' के बाद क्या होगा वापसी का रास्ता साफ?

Published: Thu, 18 Jun 2026 10:00 PM (IST)

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बावजूद होर्मुज में फंसे 13 भारतीय जहाजों की वापसी अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

होर्मुज में फंसे हैं 13 भारतीय जहाज

होर्मुज में फंसे हैं 13 भारतीय जहाज

HighLights

  1. होर्मुज में 13 भारतीय जहाज अभी भी फंसे हुए हैं।

  2. अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद भी वापसी अनिश्चित।

  3. सरकार जहाजों और नाविकों की सुरक्षित निकासी हेतु प्रयासरत।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। युद्ध समाप्ति की घोषणा होने के तीन दिन बाद और 17 जून 2026 को अमेरिका व ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते के बावजूद यह साफ नहीं है कि होर्मुज में फंसे 13 भारतीय जहाज वहां से कब वापस निकलेंगे।

पिछले चार दिनों में होर्मुज से एलएनजी शिपिंग जहाज दिशा के अलावा कोई भी भारतीय जहाज बाहर नहीं निकल सका है। दिशा 62,370 मैट्रिक टन एलएनजी ले कर शुक्रवार (19 जून) को गुजरात के दहेज पोर्ट पर पहुंचने की पूरी संभावना है। लेकिन सरकारी अधिकारियों को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि अन्य भारतीय जहाज वहां से कब निकलेंगे, इससे चिंता बनी हुई है।

होर्मुज में फंसे हैं 13 भारतीय जहाज 

13 भारतीय जहाजों के अलावा पश्चिम एशिया के अन्य समुद्री क्षेत्रों में भारत के लिए तेल-गैस-उर्वरक ले कर आने वाले करीब 20 अन्य जहाज भी फंसे पड़े हैं। सरकार पूरे मामले में सक्रिय है।

जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारतीय जहाजों को होर्मुज तथा अन्य स्थानों से सुरक्षित निकालने के लिए विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ निरंतर समन्वय किया जा रहा है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष की शुरुआत इस साल फरवरी के अंत में हुई थी। उस समय होर्मुज तथा पर्शियन गल्फ क्षेत्र में 22 से 38 भारतीय ध्वज वाले या भारत के लिए माल से लदे जहाज फंसे हुए थे, जिन पर सैकड़ों भारतीय नाविक सवार थे।

अब तक कुछ जहाज (जिसमें हालिया एलएनजी कैरियर 'दिशा' शामिल है) निकलने में सफल हुए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में जहाज अभी भी क्षेत्र में अटके हुए हैं। सरकार और शिपिंग कंपनियां नाविकों की सुरक्षा तथा जहाजों की निकासी के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

वैसे ईरान और अमेरिका के बीच 17 जून को हुए प्रारंभिक शांति समझौते (एमओयू) में होर्मुज जलडमरूमध्य से फंसे जहाजों को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

समझौते के तहत व्यावसायिक जहाजों के लिए 60 दिनों तक टोल-फ्री यानी बिना किसी शुल्क के सुरक्षित पासेज की व्यवस्था की गई है। ईरान को इन सभी जहाजों को सुरक्षित निकालने में मदद करनी होगी। और 30 दिनों के अंदर पूर्ण यातायात बहाल करना होगा।

होर्मुज खुलेगा या लगेगी फीस?

अमेरिका की नौसेना ब्लॉकेड हटाई जाएगी और माइन्स क्लियरेंस की प्रक्रिया शुरू होगी। समझौता 60 दिनों के सीजफायर को आगे बढ़ाने की व्यवस्था करता है, जिसमें न्यूक्लियर बातचीत और प्रतिबंधों में राहत भी शामिल है। ईरान ने कहा है कि 60 दिनों के बाद वह संप्रभुता के अधिकार का पालन करते हुए होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से सर्विस फीस लेने का अधिकार रखेगा।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज जलमार्ग के खुल रहा है और वहां से बाहर निकलने वाले जहाजों की संख्या भी बढ़ रही है लेकिन पूरी प्रक्रिया के सामान्य होने में समय लगेगा। शिपिंग ट्रैकर कंपनियों की सूचना के मुताबिक 16 से 18 जून के बीच 40-50 जहाज होर्मुज के पश्चिम हिस्से से बाहर निकले हैं।

पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत होने के बाद रोजाना औसतन 4-5 जहाज ही बाहर निकल रहे थे। जबकि सामान्य दिनों में वहां से 80-100 जहाजों बाहर निकल कर दुनिया भर में तेल, गैस, उर्वरक आदि की आपूर्ति करते रहे हैं। कई जहाज समुद्री माइंस को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त होना चाहते हैं जबकि कुछ जहाजों के बीमा की अवधि खत्म हो चुकी है, जिसकी वजह से समस्या आ रही है।

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