विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

FIR और NCR में क्या है अंतर? जब पुलिस दर्ज न करे एफआईआर तो करें ये काम

Published: Wed, 28 Jan 2026 05:26 PM (IST)Updated: Wed, 28 Jan 2026 05:39 PM (IST)

भारत में FIR गंभीर मामले और NCR मामूली अपराध के मामले में दर्ज की जाती है। एफआईआर के मामले में ...और पढ़ें

FIR और NCR में यहां देखें अंतर।

 FIR और NCR में यहां देखें अंतर।

HighLights

  1. एफआईआर गंभीर मामले में दर्ज की जाती है।

  2. सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत भी एफआईआर दर्ज की जा सकती है।

एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। हमारे देश में जब भी किसी व्यक्ति को अपने साथ हुए जुर्म के खिलाफ शिकायत दर्ज करवानी होती है, तो वह सबसे पहला रुख पुलिस स्टेशन की ओर ही करते हैं। यहां न केवल व्यक्ति की बात को इत्मीनान से सुना जाता है, बल्कि आरोपी के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के लिए रिपोर्ट भी दर्ज की जाती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दो तरीके से दर्ज की जाती है। जी हां जब भी किसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है, तो पुलिस सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति की बात सुनती है और मामले की गंभीरता के आधार पर ही तय करती है कि आरोपी पर FIR दर्ज करनी है या NCR

हालांकि आमतौर पर बहुत ही कम लोग ही एनसीआर के बारे में जानते हैं। इसलिए आज इस लेख के जरिये हम आपको FIR यानी (फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) और NCR यानी ( नॉन कॉग्निजेबल रिपोर्ट) के बीच में अंतर बताएंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि आप किन मामलों में एनसीआर दर्ज करवा सकते हैं और यह एफआईआर से कैसे अलग होती है।

पहले समझें दोनों में अंतर

क्या आप जानते हैं कि किसी व्यक्ति पर एफआईआर इतनी आसानी से दर्ज नहीं की जा सकती है।  एफआईआर केवल संज्ञय यानी गंभीर मामले के आरोप में ही दर्ज की जाती है। एफआईआर में पुलिस के पास बगैर किसी वारंट के आरोपी को आरेस्ट करने का अधिकार होता है, जबकि एनसीआर गैर-संज्ञेय यानी मामूली अपराध के खिलाफ दर्ज की जाती है।

एनसीआर दर्ज करते वक्त पुलिस को किसी व्यक्ति को अरेस्ट करने से पहले कोर्ट की इजाजत लेना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही जब किसी व्यक्ति पर FIR दर्ज की जाती है, तो यह मामला कोर्ट तक पहुंचता है, जबकि एनसीआर में ज्यादातर मामले पुलिस द्वारा खुद ही सुलझा लिए जाते हैं।

किस आधार पर तय होती है FIR या NCR

आरोपी के खिलाफ कब कौन-सी रिपोर्ट दर्ज करनी है। यह मामले की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति ने हत्या, बलात्कार, डकैती, किडनैपिंग या पोस्को एक्ट के तहत जुर्म किया है, तो पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज की जाती है। वही एनसीआर में गैर-संज्ञेय अपराध जैसे पारिवारिक लड़ाई, मामूली मारपीट, दस्तावेज या सामान का खो जाने पर एनसीआर दर्ज की जाती है।

किस रिपोर्ट में होती है तुरंत कार्यवाही

आरोपी पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस द्वारा तुरंत इन्वेस्टिगेशन शुरू कर दी जाती है। साथ ही पुलिस आरोपी को बगैर किसी वारंट के गिरफ्तार भी कर सकती है। इसके साथ ही NCR में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस को आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने का अधिकारी नहीं होता है। एनसीआर के मामले में पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार करने से पहले कोर्ट की इजाजत लेनी होती है।


एफआईआर दर्ज न होने पर करें ये काम

एफआईआर दर्ज करना भारत के हर नागरिक का एक संवैधानिक अधिकार है। लेकिन अधिकतर मामले में पुलिस की ओर से पीड़ित व्यक्ति की एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है। ऐसे में अगर पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती हैं, तो आप पुलिस की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से भी एफआईआर दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए आप ई-एफआईआर एप इंस्टॉल करके शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

आपके पास FIR दर्ज करने का दूसरा तरीका यह भी है कि आप वरिष्ठ अधिकारी के पास भी जा सकते हैं। लेकिन अगर इसके बाद भी आपकी एफआईआर दर्ज नहीं की जाती हैं, तो आप सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के पास अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। आपको बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने धारा 482 के तहत लोगों को यह अधिकार दिया है कि वे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पास एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं।

यह भी पढ़ें: सड़क के इस लेन पर चला सकते हैं तेज रफ्तार में गाड़ी, ज्यादातर लोगों को नहीं पता होगा जवाब