उत्तर प्रदेश के कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में यूनिफार्म होगी अनिवार्य, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दिए निर्देश
उत्तर प्रदेश के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी में नए सत्र से ड्रेस कोड लागू करने का आदेश दिया गया है। ...और पढ़ें

उत्तर प्रदेश के कॉलेज विश्वविद्यालयों में ड्रेस कोड होगा लागू।
HighLights
यूपी के सभी उच्च संस्थानों में लागू होगा ड्रेस कोड।
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने इसी सत्र लागू करने का दिया निर्देश।
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कॉलेजों या विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे स्टूडेंट्स या एडमिशन लेने जा रहे छात्रों के लिए बड़ी खबर है। राज्य के सभी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने के दिशा निर्देश दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जन भवन में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक में इस निर्णय पर मुहर लग गई है।
छात्रों के बीच से भेदभाव की संभावना को खत्म करने के लिए उठाया गया कदम
राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में कुलाधिपति ने ड्रेस कोड को लागू करते हुए कहा कि स्कूलों के समान ही अब कॉलेज और विश्वविद्यालयों में इस नियम का पालन किया जाये। इससे स्टूडेंट्स के बीच भेदभाव या सामाजिक असमानता की संभावना कम होगी।
अब स्कूल के बाद भी ड्रेस से छूट नहीं
अभी तक कॉलेज और यूनिवर्सिटी में ड्रेस कोड लागू नहीं था जिससे स्कूल खत्म होने के बाद छात्रों को इससे छुटकारा मिल जाता था। लेकिन, अब कॉलेज और विश्वविद्यालयों में इस नियम के से स्टूडेंट्स को ड्रेस से छूट नहीं मिलेगी।
लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने पर दिया जोर
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ड्रेस कोड के साथ ही आगे कहा कि राज्य के संस्थानों में इसी सत्र से रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किये जाएं जिससे लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके। विशेष रूप से उन्होंने महिलाओं के लिए ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, मेहंदी, जीएसटी, बिंदी निर्माण, लेखांकन और बाजरा आधारित भोजन तैयार करने जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्देश दिया है।
हॉस्टल में भी सुधार का दिया आदेश
राज्यपाल ने महिला महाविद्यालयों के हॉस्टल की स्थिति में सुधार लाने और छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्राओं को उचित मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए ताकि वे असामाजिक प्रभावों से सुरक्षित रहें। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी समिति बनाने पर भी जोर दिया जहां छात्राएं अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
