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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 31, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Economic Survey 2020: नौकरी और शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20?

By Rishi SonwalEdited By:
Published: Fri, 31 Jan 2020 03:00 PM (IST)

Economic Survey 2020 on Jobs and Education वित्त मंत्री ने 2019-20 का आर्थिक सर्वेक्षण 31 जनवरी 2020 को प्रस्तुत करते हुए कई महत्वपूर्ण आकड़े पेश किये।

Economic Survey 2020: नौकरी और शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20?
Economic Survey 2020: नौकरी और शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20?

नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क। Economic Survey 2020 on Jobs and Education: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2019-20 के लिए देश का आर्थिक सर्वेक्षण लोक सभा में 31 जनवरी 2020 को प्रस्तुत करते हुए कई महत्वपूर्ण आकड़े पेश किये। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बताया कि वर्ष 2011 से 2018 के दौरान कुल 2.62 करोड़ नई नौकरियों का सृजन हुआ। जिसमें से 1.21 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों और 1.39 करोड़ शहरी क्षेत्रों मे नई नौकरियां पैदा हुईं।

वहीं, महिलाओं को नियमित रोजगार के क्षेत्र में वर्ष 2017-18 में वर्ष 2011-12 की तुलना में 8 फीसदी अधिक अवसर प्रदान किये गये।

वर्ष 2019-20 के लिए देश के आर्थिक सर्वेक्षण भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने बताया कि “असेंबल इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड” को “मेक इन इंडिया” के साथ एकीकृत करने से भारत वर्ष 2025 तक 4 करोड़ और वर्ष 2030 तक 8 करोड़ उत्तम वैतनिक रोजगार देने में सक्षम होगा।

वित्त मंत्री ने इकनॉमिक सर्वे भाषण में बताया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत नवंबर 2019 तक कुल 69.03 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण में जिक्र किया गया है कि अतिरिक्त रोजगार के सृजन के साथ ही जॉब की गुणवत्ता सुधारने और अर्थव्यवस्था के नियमतिकरण के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

लेबर इंटेंसिव सेक्टर्स जैसे कपड़ा, वस्त्र, फुटवीयर और खिलौना में अत्यधिक निर्यात संभावनाओं के चलते इनमें अधिक रोजगार सृजन किया जा सकता है।

नियमित मजदूरी और वेतन की हिस्सेदारी वर्ष 2017-18 में वर्ष 2011-12 की तुलना में 18 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो गयी। वहीं, स्वरोजगार की श्रेणी में कामगारों का वितरण दोनो तुलनात्मक वर्षों में समान ही रहा।

वर्ष 2019-20 के लिए देश के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार जहां सामान्य शिक्षा लोगों के ज्ञान को बढ़ाती है वहीं, कौशल प्रशिक्षण से उनकी इम्प्लॉएबिलीटी बढ़ती है और लेबर मार्केट (रोजगार क्षेत्र) में औद्योगिक या प्रोफेशनल जरूरतों के लिए भी तैयार करती हैं।

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