जामिया मिल्लिया: संस्थान के लिए क्यों भीख मांगने के लिए तैयार थे महात्मा गांधी, कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई थी, जो ब्रिटिश काल के संघर्षों का प्रतीक है। महात्मा ...और पढ़ें

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HighLights
साल 1920 में हुई थी संस्थान की स्थापना।
1925 में जामिया को अलीगढ़ से दिल्ली लाया गया।
04 जून, 1939 में जामिया को संस्थान के रूप में पंजीकृत किया गया।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली में स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया को इसकी खूबसूरत ऐतिहासिक इमारतों और शिक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संघर्षों के लिए भी जाना जाता है। साल 1920 में ब्रिटिश काल में इस संस्थान की स्थापना की गई थी। इसी समय देश में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के अतिरिक्त तीन अन्य बड़ी संस्थाएं काशी विद्यापीठ, गुजरात विद्यापीठ और बिहार विद्यापीठ भी स्थापित की गई थी।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ऐतिहासिक जड़े दिल्ली में नहीं, बल्कि अलीगढ़ में मौजूद है। जी हां महात्मा गांधी के सहयोग से इसकी स्थापना 22 नवंबर, 1920 में अलीगढ़ में की गई थी।
अलीगढ़ में हुई थी स्थापना
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना तमाम लोगों के संघर्ष और त्याग को बयां करती है। इस संस्थान की स्थापना पश्चिमी शिक्षा के विरोध में की गई थी। उर्दू भाषा में जामिया अर्थ 'विश्वविद्यालय' और मिल्लिया का अर्थ 'राष्ट्रीय' है। इसकी स्थापना 22 नवंबर, 1920 में अलीगढ़ में की गई थी। संस्थान के पहले चांसलर हकीम अजमल खान और पहले वाइस चांसलर मोहम्मद अली जौहर को बनाया गया था।

बंद होने के कगार पर था संस्थान
जामिया मिल्लिया इस्लामिया अपने शुरुआती चरण में तो खूब फला-फूला। लेकिन धीरे-धीरे राजनीति की आंच इस पर भी पड़ने लगी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कई छात्रों एवं शिक्षकों ने ब्रिटिश सरकार की हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई। लेकिन औपनिवेशिक ब्रिटिश सरकार ने उनके खिलाफ विरोध करने वाले छात्रों एवं शिक्षकों को कैद कर लिया। इसके बाद 1922 में गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन को वापस लिया गया। जिसके बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा छात्रों एवं शिक्षकों को छोड़ा गया। लेकिन असहयोग और खिलाफत आंदोलन के बाद से ही संस्थान को वित्तीय सहायता मिलना बंद हो गई थी।

संस्था के लिए भीख मांगने के लिए तैयार थे महात्मा गांधी
कहावत है दुखों के बादल हमेशा नहीं रहते। संस्थान पर जब वित्तीय खतरा मंडरा रहा था। तब इसे चलाने के लिए हकीम अजमल खान, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी और अब्दुल मजीद ख्वाजा ने संस्थान को गांधी की सहायता से साल 1925 में अलीगढ़ से दिल्ली के करोल बाद में स्थापित किया। महात्मा गांधी संस्थान को किसी भी कीमत में बंद नहीं करना चाहते थे। उन्होंने एक बार कहा भी था कि जामिया को हर हाल में चलना होगा और अगर तुम्हें वित्तीय सहायता की चिंता है, तो मैं इसके लिए कटोरा लेकर भीख मांगने के लिए भी तैयार हूं।
इसके बाद गांधी जी ने संस्थान को चलाने के लिए बहुत लोगों से संपर्क किया। हकीम अजमल खान ने अपनी जेब से जामिया के लिए पैसे खर्च किए और डॉ एमए अंसारी और अब्दुल मजीद ख्वाजा ने भारत से विदेशों में जाकर संस्थान के महत्व को समझाया और इसके लिए धन इकट्ठा किया।

नए रूप में जामिया
साल 1925 में तीन दोस्तों के एक समूह डॉ. जाकिर हुसैन, डॉ. आबिद हुसैन और डॉ. मोहम्मद मुजीब ने विदेश में शिक्षा पूरी करने के बाद संस्थान की कमान अपने हाथों में ली। जामिया में डॉ. जाकिर हुसैन द्वारा शाम की कक्षाओं में प्रौढ़ शिक्षा दी जाने लगी, जोकि काफी ज्यादा लोकप्रिय भी रही। इसके बाद साल 1926 में डॉ. जाकिर हुसैन को वाइस चांसलर के रूप में नियुक्त किया गया। 01 मार्च, 1935 में जामिया को दिल्ली के ओखला में स्थापित किया गया और 4 साल बाद यानी 04 जून, 1939 को जामिया को एक संस्थान के रूप में पंजीकृत किया गया।
बता दें, जामिया पूरे देश में सबसे पहले टीचर्स को प्रशिक्षण देने वाली संस्था के रूप में जाना जाता है। देश के अलग-अलग कोने से शिक्षक यहां प्रशिक्षण लेने के लिए आते । वर्तमान में इस संस्थान में 56 पीएचडी, 80 मास्टर्स और 56 तरह के ग्रेजुएशन कोर्स संचालित किए जा रहे हैं।
Source: जामिया मिलिया इस्लामिया वेबसाइट
https://jmi.ac.in/About-Jamia/Profile/History/History
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