जेल की सलाखों के पीछे भी नहीं टूटा हौसला, घर जला और परिवार पर हुआ जानलेवा हमला; चुनौतियों को हराकर कैसे DSP बने जैनेंद्र कुमार
डीएसपी जैनेंद्र कुमार निगम की कहानी जीवन के तमाम संघर्षों को बंया करती है। जेल की सलाखों के पीछे रहने ...और पढ़ें

Who Is DSP Jainendra Kumar Nigam: यहां पढ़ें जैनेंद्र कुमार की सक्सेस स्टोरी।
HighLights
जैनेंद्र कुमार मध्य प्रदेश भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के रहने वाले हैं।
साल 2024 की परीक्षा में वह 12वीं रैंक हासिल करके डीएसपी बने।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से वाले DSP जैनेंद्र कुमार निगम की कहानी किसी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। उनकी कहानी एक तरफ जीवन की तमाम चुनौतियों और दुखों को बयां करती है, तो दूसरी तरफ उन चुनौतियों का डटकर सामना करने का हौसला भी देती है।
आपसी रंजिश के कारण कई दिन सलाखों के पीछे बिताने से लेकर परिवार पर जानलेवा हमला होने और घर जलाने जैसी तमाम बुरी मंशाओं के बावजूद भी जैनेंद्र कुमार का हौसला नहीं टूटा। वह हथकड़ी पहनकर MPPSC की परीक्षा देने के लिए एग्जाम सेंटर पहुंचे और इस परीक्षा में सफल भी हुए। जैनेंद्र कुमार की कहानी बताती है कि अगर आपके अंदर अपने सपनों को पूरा करने का जुनून हैं, तो जीवन की विषम परिस्थितियां भी आपको सपनों को पूरा करने से रोक नहीं सकती है।
DSP जैनेंद्र कुमार निगम के बारे में
डीएसपी जैनेंद्र कुमार निगम मध्य प्रदेश भिंड जिले के डोंगरपुरा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता केशव कुमार निगम एक किसान और मां कुसुम देवी एक गृहिणी हैं। जैनेंद्र के पिता भी राज्य सिविल सर्विस की परीक्षा पास करना चाहते थे। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक तंगहाली के कारण उन्हें अपने सपनों को बीच में ही अधूरा छोड़ना पड़ा। लेकिन जैनेंद्र ने अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए दिन रात कड़ी मेहनत की और डीएसपी बनकर परिवार का नाम रोशन किया।
झूठे मुकदमे में जाना पड़ा था जेल
जैनेंद्र कुमार को रंजिश के चलते दो बार जेल भी जाना पड़ा था। झूठे मुकदमे में फंसाकर जैनेंद्र, उनके भाई और उनके पिता पर FIR हुई और निर्दोष होने के वाबजूद भी जैनेंद्र को जेल सलाखों में रहना पड़ा।
घर जलाया और परिवार पर हुआ जानलेवा हमला
जैनेंद्र और उनके परिवार का जीवन बेहद ही कठिनाइयों से भरा है। जैनेंद्र और उनके परिवार को परेशान करने के लिए उनका घर जलाया गया और उन पर जानलेवा हमला भी करवाया गया। इसी समय जैनेंद्र MPPSC परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। लेकिन झूठे मुकदमे के कारण उन्हें एक बार फिर जेल जाना पड़ा। जीवन में तमाम चुनौतियों के बावजूद भी जैनेंद्र ने अपनों हौसलों को टूटने नहीं दिया। वह पुलिस के साथ एग्जाम सेंटर में परीक्षा देने पहुचे।। उनके एक हाथ में हथकड़ी बंधी थी और दूसरे हाथ से वह MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा दे रहे थे। एग्जाम सेंटर में बैठे सभी अभ्यर्थियों की निगाहें जैनेंद्र उन पर थी। लेकिन जैनेंद्र की आंखों में केवल डीएसपी बनने का सपना था।
मां से किया वादा और बने DSP
जेल की सलाखों से बाहर आने के बाद भी जैनेंद्र और उनके परिवार की मुश्किलें कम नहीं हुई। इस बार जैनेंद्र पर हत्या का आरोप लगाया गया और उनके परिवार का एक्सीडेंट भी करवाया गया। इस एक्सीडेंट में जैनेंद्र की मां और उनके भाई बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। परिवार पर हुए हमले के बाद जैनेंद्र पूरी तरह से टूट गए थे। लेकिन इस बार उन्होंने मन में ठान लिया था कि वह डीएसपी बनकर रही रहेंगे। उन्होंने अपनी मां का हाथ पकड़ा और उनसे कहा चाहे मुझे जमीन आसमान एक ही क्यों ना करना पड़े। लेकिन इस बार मैं DSP बनकर ही वापस लौटूंगा।
2024 में क्रैक किया MPPSC
मध्य प्रदेश की पीसीएस परीक्षा पास करना जैनेंद्र के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने साल MPPSC 2020 की परीक्षा पास करके नायब तहसीलदार का पद हासिल किया। इसके बाद उन्होंने दोबारा MPPSC की परीक्षा ली। लेकिन इस बार उनका फाइनल सिलेक्शन नहीं हो पाया। साल 2022 की पीसीएस परीक्षा में उन्होंने सहायक संचालक का पद हासिल किया। उन्होंने दोबारा परीक्षा की तैयारी की और साल 2024 की परीक्षा में 12वीं रैंक हासिल करके डीएसपी बन गए।
