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बचपन में दोस्तों ने किया था पिता के काम का अपमान, पहले प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर रिक्शा चालक का बेटा बना IAS

Published: Fri, 23 Oct 2026 04:54 PM (IST)

आईएएस गोविंद जायसवाल को हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने साल 2006 ...और पढ़ें

Who Is IAS Govind Jaiswal: यहां पढ़ें आईएएस गोविंद जायसवाल की सक्सेस स्टोरी।

Who Is IAS Govind Jaiswal: यहां पढ़ें आईएएस गोविंद जायसवाल की सक्सेस स्टोरी।

HighLights

  1. हिंदी मीडियम से पहले ही प्रयास में क्रैक किया यूपीएससी।

  2. रिक्शा चालक का बेटा बना आईएएस।

करियर डेस्क, नई दिल्ली। वाराणसी में जन्मे एक 11 साल के बच्चे के मन में पिता के काम को लेकर मारा गया ताना इस कदर घर कर गया कि उन्होंने उसी पल बड़े होकर IAS बनने का संकल्प ले लिया। इस 11 साल के बच्चे ने अपने पिता की बेइज्जती का जवाब गुस्से में नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से दिया।

एक दिन यही बच्चा बड़ा होकर अपनी कड़ी मेहनत और लगन से IAS ऑफिसर बना। लेकिन एआईएस बनने तक का सफर बेहद ही कठिनाइयों से भरा था। घर के माली हालत ठीक नहीं थे और बचपन में ही मां की ममता का साया सिर से उठ गया था। लेकिन मन केवल IAS बनने की जिद थी। जिसे पूरा करने के लिए गाविंद जायसवाल ने दिन रात कड़ी मेहनत की और पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास ली।

दोस्तों ने किया था पिता का अपमान

गाविंद जायसवाल के पिता नारायण जायसवाल रिक्शा चलाने का काम करते थे। वह जब भी अपने बेटे को स्कूल छोड़ने जाया करते थे, तो बच्चे यह कहकर ताना देते थे आ गया रिक्शे वाले का बेटा। ग्यारह साल की उम्र में गोविंद के पिता के काम को लेकर उनके दोस्त के घर में भी मजाक बनाया गया था। हालांकि उस दौरान गोविंद ने उस बात का जवाब तो नहीं दिया। लेकिन उन्होंने मन ही मन में ठान लिया था कि वह एक दिन बड़े होकर ऑफिसर बनेंगे, ताकि कोई भी उनका अपमान न कर सके।

बचपन में उठा सिर से मां का साया

गोविंद जब कक्षा 7 में थे। तब उनकी मां को ब्रेन हेमरेज हुआ था। पत्नी के इलाज के लिए नारायण जायसवाल को मजबूरन 20 से ज्यादा रिक्शे बेचने पड़े और जो कुछ भी जमा पूंजी थी। वह सब पत्नी के इलाज में खर्च हो गई। लेकिन फिर भी गोविंद की मां बच नही सकीं। मां की मृत्यू के बाद पूरा परिवार टूट सा गया था। गरीबी का आलम यह था कि परिवार को अपना पेट भरने के लिए काफी ज्यादा मुश्किलों को सामना करना पड़ता था।

आसान नहीं था यूपीएससी का सफर

गोविंद के लिए यूपीएससी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। भले ही उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा पास कर ली हो। लेकिन तैयारी के दौरान उन्हें और उनके पूरे परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। साल 2006 में गोविंद स्नातक पूरा के बाद यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली तो चले आए। लेकिन उनके लिए पढ़ाई का खर्च निकालना बेहद की कठीन हो गया था। इसलिए अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया। घर के माली हालत भी ठीक नहीं थे। इसलिए तैयारी के दौरान उन्हें चाय और एक समय का खाना भी बंद करना पड़ा।

पहले प्रयास में क्रैक किया UPSC

गोविंद जायसवाल ने हिंदी मीडियम से अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्रैक किया था। हिंदी मीडियम से होने के कारण उन्हें अन्य अभ्यर्थियों के मुकाबले कम समझा जाता था। लेकिन गोविंद ने कभी भी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह लगातार मेहनत करते गए और साल 2006 में ऑल इंडिया रैंक 48वीं हासिल करके आईएस बन गए। आज गोविंद लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक प्रेरणा की मिसाल है। बता दें, गोविंद जायसवाल को हाल ही में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल का प्रधान सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है।

 

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