अरावली की परिभाषा और सीमा तय करने पर मंथन, समिति ने आम लोगों से मांगे सुझाव
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित अरावली समिति ने अरावली पर्वत शृंखला की परिभाषा और सीमांकन पर आम लोगों व संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं।

अरावली समिति ने मांगे जन सुझाव
HighLights
सुप्रीम कोर्ट गठित अरावली समिति ने मांगे जन सुझाव।
अरावली पर्वत शृंखला की परिभाषा और सीमांकन पर राय।
समिति 31 अगस्त तक सौंपेगी अपनी समीक्षा रिपोर्ट।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित अरावली समिति ने अरावली पर्वत शृंखला से जुड़े विभिन्न विषयों पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से उनके विचार, सुझाव और राय मांगी है।
अरावली हिल रेंज की परिभाषा और सीमांकन यानी इसके क्षेत्र को स्पष्ट रूप से तय करने और इसके दायरे के संबंध में केंद्र सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपोर्ट की निष्पक्ष समीक्षा के लिए 25 मई को इस उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था।
अरावली समिति ने मांगे जन सुझाव
पर्यावरण मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, समिति ने एनसीआर की सरकारों के अलावा पर्यावरणविदों, खनन का पट्टा रखने वालों और स्थानीय समुदायों सहित सभी पक्षों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जिनकी आजीविका और जीवन इस क्षेत्र की प्राकृतिक जैव विविधता से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि लोग इस सूचना के जारी होने के 21 दिनों के भीतर ईमेल या आधिकारिक गूगल फार्म के जरिये अपनी राय भेज सकते हैं। यदि संभव हो तो सुझावों के साथ उनसे जुड़े दस्तावेज या ऐसे प्रमाण भी संलग्न किए जा सकते हैं, जिनकी सत्यता की जांच की जा सके।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब समिति में मुख्य रूप से पूर्व सरकारी अधिकारियों के शामिल होने के कारण इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। इस समिति को 31 अगस्त तक अपनी समीक्षा रिपोर्ट सौंपनी है।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- 1996 दौसा बस बम धमाके का आरोपी सलीम पप्पू बरी, सुप्रीम कोर्ट ने रद की अब्दुल की मौत की सजा
