1996 दौसा बस बम धमाके का आरोपी सलीम पप्पू बरी, सुप्रीम कोर्ट ने रद की अब्दुल की मौत की सजा
सुप्रीम कोर्ट ने 1996 के दौसा बस बम विस्फोट मामले में दोषी अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद कर नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल हमीद की मौत की सजा की रद
HighLights
अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद, नए सिरे से सुनवाई।
पप्पू उर्फ सलीम को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों से बरी किया।
प्रभावी कानूनी सहायता न मिलने पर नया ट्रायल।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1996 में राजस्थान के दौसा जिले में बस में हुए बम विस्फोट मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोषी अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद कर दी और उसके खिलाफ नए सिरे से सुनवाई के आदेश दिए हैं।
अदालत ने कहा कि पहले ट्रायल के दौरान आरोपित को प्रभावी कानूनी सहायता नहीं मिल सकी थी। वहीं, उम्रकैद की सजा काट रहे पप्पू उर्फ सलीम को बरी कर दिया गया।
अदालत ने राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा छह अन्य आरोपितों को बरी किए जाने के फैसले में भी हस्तक्षेप से इनकार कर राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।
अब्दुल हमीद की मौत की सजा रद
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मंगलवार को कहा कि मामले की सुनवाई हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित एक वरिष्ठ जज की अदालत में होगी और कोशिश की जाए कि नया ट्रायल एक वर्ष के भीतर पूरा हो। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब्दुल हमीद अपनी पसंद का वकील नियुक्त कर सकेगा।
यह मामला 22 मई, 1996 का है, जब आगरा से बीकानेर जा रही एक बस में दौसा जिले के पास बम विस्फोट हुआ था। इस घटना में 14 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे।
राजस्थान हाई कोर्ट ने 2019 में अब्दुल हमीद की मौत की सजा और पप्पू उर्फ सलीम की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर, 2019 को हमीद की फांसी पर रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में पप्पू उर्फ सलीम को आरोपों से मुक्त कर दिया। साथ ही हाई कोर्ट द्वारा जम्मू-कश्मीर के पांच आरोपितों और आगरा के एक आरोपित समेत छह लोगों को बरी किए जाने के फैसले को भी बरकरार रखा।
इसके अलावा, बांदीकुई की ट्रायल कोर्ट द्वारा फारुख अहमद खान को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील भी खारिज कर दी गई।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
