दूसरों को कामयाब होते देख आप भी बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित तो हो जाते हैं, पर जब उसे पाने के लिए कठिन डगर पर चलने की बारी आती है तो आपको भीतर ही भीतर डर भी लगने लगता है। आप में से कई लोग इस डर को अपने करीबियों से साझा करके इससे मुक्त होने का प्रयास करते हैं, पर कई इसमें भी झिझकते हैं। अगर आप अपनी मंजिल को पाने के लिए वांछित क्वालिटी की जरूरत को बखूबी समझते हैं और आपको खुद के सामर्थ्य पर भरोसा है, तो समय रहते अपनी क्षमता को बढ़ाकर अपने मन के डर और संशय को दूर भगा सकते हैं। अपनी क्षमता बढ़ाकर कॉन्फिडेंस के साथ कैसे बढ़ें कामयाबी की राह पर, बता रहे हैं अरुण श्रीवास्तव...

ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे पवन सिंह एक ऐसे गांव में रहते हैं, जो आज भी तमाम संसाधनों से वंचित है। पर कामयाब लोगों की खबरें पढ़-सुन कर उन्हें भी अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा मिली है। फिलहाल उनका सपना आइएएस बनना है। वे अपने इस सपने को किसी भी तरह पाना चाहते हैं। हालांकि उन्हें अच्छी तरह पता है कि इस सपने को पूरा करना इतना आसान नहीं है। इसके लिए लंबे समय तक सही स्ट्रेटेजी के साथ कठिन परिश्रम करने की जरूरत है। वह मेहनत करने को तो तैयार हैं, पर यह समझ में नहीं आ रहा कि बिना मार्गदर्शन के आगे कैसे बढ़ें? उनके परिवार, सहपाठियों, मित्रों में कोई भी ऐसा नहीं, जिनसे इस बारे में कोई कारगर दिशा-निर्देश मिल सके।

ठिठकते कदम

एक बड़े लक्ष्य को पाने की ओर बढ़ने में पवन को डर भी लग रहा है। सपने को हासिल करने को लेकर उनके मन में आशा है, तो संशय भी। संशय अपनी क्षमताओं और प्रयासों को लेकर है। कभी-कभी उन्हें इस बात को लेकर संशय होता है कि पता नहीं उनके भीतर इस लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता है भी या नहीं? क्या वह इसके लिए वांछित प्रयास पूरी ईमानदारी से कर सकेंगे? संसाधनों और मार्गदर्शन की कमी भी उनके डर में इजाफा करती रहती है। इन सब के बावजूद हौसले और इच्छा शक्ति की बदौलत वह अपने प्रयासों से पीछे नहीं हटना चाहते। इसके लिए उन्हें अपने भीतर से प्रेरणा मिलती रहती है। उन्हें भरोसा है कि अपने हौसले और अनवरत प्रयासों से वह अपने लक्ष्य को जरूर हासिल कर सकेंगे। इसके लिए वह संसाधनों को जुटाने और मार्गदर्शन पाने की भी हर संभव कोशिश कर रहे हैं।

चुनौतियों से पाएं पार

पवन जैसे उत्साही और स्व-प्रेरित युवाओं की हमारे देश में कमी नहीं। इनमें से अधिकतर को अच्छी तरह से पता होता है कि उनके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। पर यही तो असली चुनौती है। समुचित किताबें, कोचिंग और मार्गदर्शन न होने के बावजूद हौसले के दम पर वे अपना आत्मविश्वास बढ़ाने और उपयुक्त रास्ता तलाशने में लगातार जुटे हैं। वेबसाइट्स, ईमेल, स्मार्टफोन, फेसबुक, यूट्यूब, व्हाट्सऐप आदि के जरिए संसाधनों की कमी की भरपाई करने का प्रयास भी कर रहे हैं।

कमजोरियों को करें काबू

अगर आपको भी आगे बढ़ते हुए कोई डर सता रहा है, तो एक बार शांति के साथ बैठकर यह आकलन करें कि आखिर आपके डर का कारण क्या है? वह क्यों आपको परेशान कर रहा है? किसी भी लक्ष्य की ओर बढ़ने से पहले यह जरूर देखें कि इसके लिए किन-किन मूलभूत चीजों की जरूरत आपको है, क्योंकि सिर्फ सपने देख लेने भर से वह पूरा नहीं हो सकता। अपनी क्षमताओं का ईमानदारी से आकलन करें। कहां, क्या कमी है, उसे जानने का प्रयत्न करें। कहीं कोई कमजोरी दिख रही है, तो उससे हार मानने की बजाय उसे दूर करने की कोशिश करें। ऐसी कोई भी कमजोरी नहीं, जिसे दूर न किया जा सके।

बढ़ाएं सामर्थ्य

हो सकता है कि कभी आपको यह लगता हो कि आपकी वर्तमान योग्यता जिस स्तर की है, उसके साथ आप अपने लक्ष्य की ओर आसानी से नहीं बढ़ सकते। इसके बावजूद अगर आप हार मानकर अपने लक्ष्य से समझौता नहीं करना चाहते, तो फिर एक ही उपाय है। आपको अपनी क्षमता या सामथ्र्य के स्तर को बढ़ाना होगा। इसके लिए नॉलेज को अपडेट करने और गहन तैयारी करने के लिए पहले से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। हो सकता है कि इसके लिए महीनों-सालों अथक मेहनत करनी पड़ी। यहां चुनौती धैर्य के साथ-साथ उत्साह को भी बनाए रखने की भी होगी।

मानसिक मजबूती

आपने देखा होगा कि हाल में विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप के फाइनल में स्पेन की कैरोलिना मारिन से हारने के बाद भारत की साइना नेहवाल ने ईमानदारी से यह स्वीकार किया कि इस मैच में मैं मानसिक मजबूती कायम न रख पाने के कारण ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सकी और इस वजह से कई गलतियां कीं। दरअसल, मैदान में खेल रहे खिलाड़ी को ही यह पता होता है कि वह तन और मन से प्रयास कर पा रहा है या नहीं। अगर वह शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से भी मजबूती दिखा पा रहा है, तभी उसका जीतना सुनिश्चित हो पाता है। इसलिए अगर आपको भी कामयाबी की ओर बढ़ना है, तो खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना होगा।

न गंवाएं मौके

खुद को मजबूत बनाए रखने के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप सामने आने वाले मौके को समझें और उसका फायदा उठाएं। कई बार दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि आइएएस या किसी अन्य एग्जाम के लिए तो चार मौके मिलते हैं, इसलिए अगर एक-दो मौके यूं ही चले गए, तो भी अभी अन्य मौके तो हैं ही। इस तरह की अप्रोच उस खरगोश की कहानी को दोहराने जैसी ही होगी, जो रेस में कछुए को बहुत पीछे देखकर कुछ देर के लिए आराम करने लगा था और इतने में उसकी आंख लग गई। नींद टूटने पर उसने पाया कि कछुआ न सिर्फ उससे काफी आगे निकल चुका है, बल्कि रेस भी जीत चुका है। इसलिए हर अवसर को आखिरी मौका समझते हुए उसके लिए जी-जान लगाकर प्रयास करें। फिर देखें, इससे आपका कॉन्फिडेंस लेवल भी बढ़ेगा और कामयाबी का दरवाजा भी खुलेगा।

* कोई भी लक्ष्य चुनते समय खुद का आकलन भी जरूर करें कि उसके लिए आप में आवश्यक सामथ्र्य है या नहीं।

* लक्ष्य को पाने की जिद है, तो अपनी क्षमता को उसके लिए वांछित स्तर पर ले जाने का भरपूर प्रयत्न करें।

* कमजोरियों या कमियों के आगे समर्पण करने की बजाय पूरी दृढ़ता के साथ उन्हेंं दूर करने का प्रयास करें।

* हर अवसर को आखिरी मौका समझते हुए उसके लिए जीतोड़ मेहनत करें। आत्मविश्वास के स्तर को भी ऊंचा बनाएं रखें।

तकनीक के साथ बढ़ाएं कदम

Posted By: Rajesh Niranjan