आई कॉन्टैक्ट यानी नजरों से नजरें मिलाकर बात करना प्रभावी कम्युननिकेशन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर आप सफल होना चाहते हैं तो आपको इसका तरीका सीखना चाहिए। आपके बात करने के तरीके से सामने वाले व्यक्ति को यह पता चल जाता है कि आप उसकी बात को कितनी तवज्जो दे रहे हैं। आंख में आंख मिलाकर बात करना सफल व्यक्तित्व के लिए जरूरी है, लेकिन आपको यह बात ध्यान में रखनी होगी कि आप यदि बहुत ज्यादा यानी लगातार आई कॉन्टैक्ट रखते हैं तो उसे एग्रेसिव माना जाता है। इसी तरह बहुत कम आई कॉन्टैक्ट रखने पर यह माना जाता है कि आपको सामने वाले की बात सुनने में रुचि नहीं है। यह एक ऐसी स्किल है, जिस पर लोग अक्सर गौर नहीं करते और इसे नजरअंदाज कर देते हैं। आपको यह बात गौर करनी चाहिए कि जितने भी सफल सेल्स पर्सन, राजनीतिज्ञ या अच्छे सार्वजनिक वक्ता होते हैं, वे आई कॉन्टैक्ट के मास्टर होते हैं।

आई कॉन्टैक्ट का महत्व

अक्सर दुकानदार लोगों की नजरें पढ़ने में माहिर होते हैं। वे आई कॉन्टैक्ट स्किल का इस्तेमाल कर ही मनोवैज्ञानिक तरीके से यह समझ जाते हैं कि ग्राहक को कौन-सा सामान पसंद है। जब कोई ग्राहक किसी वस्तु की ओर आकर्षित होता है तो उसकी पुतलियां फैल जाती हैं, जो सेल्समैन के लिए ग्राहक का मन पढ़ने का प्रमुख संकेतक होता है। इसलिए आप यह समझ सकते हैं कि आई कॉन्टैक्ट किसी कम्युनिकेशन के लिए कितना मायने रखता है। इस तरह आप आई कॉन्टैक्ट का इस्तेमाल दैनिक जीवन में अपने फायदे के लिए कर सकते हैं। बस कुछ चीजों का आपको ध्यान रखना होगा। जब आप किसी से तर्क-वितर्क करें तो आप उसे एकटक देख सकते हैं, लेकिन जब आपको किसी की बात स्वीकार कर लेनी हो तो अपनी नजरें नीची कर लेनी चाहिए।

जब ग्रुप से कर रहे हों बात

जब आप कई लोगों से किसी ग्रुप में बात कर रहे हों तो आपकी नजरें सभी सुनने वालों से बारी-बारी से मिलनी चाहिए। सिर्फ किसी एक व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट रखने की गलती बिल्कुल न करें। इससे ग्रुप के सभी सदस्यों में आपकी बात सुनने की रुचि नहीं रहेगी।

जब किसी एक व्यक्ति से हो बात

किसी एक व्यक्ति से बातचीत कर रहे हों तो आई कॉन्टैक्ट रखना आपके लिए आसान होता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप उसे लगातार गहराई से घूरेंगे तो वह असहज हो जाएगा। इसके लिए अच्छा तरीका यह है कि आप हर पांच-दस सेकंड पर एक बार नजरें थोड़ी इधर-उधर कर लें। लेकिन आई कॉन्टैक्ट तोड़ते समय नजरें नीची न करें क्योंकि इससे ऐसा लगेगा कि आपकी बात खत्म हो गई। इसकी जगह कुछ सेकंड ऊपर की ओर कहीं देख लें या कुछ सोचने की मुद्रा में रहें।

किसी की बात सुननी हो तो

जब आप किसी की बात सुन रहे हों तो इस बात का ध्यान रखना होगा कि उसे लगातार घूरते न रहें। इससे सामने वाले के लिए बात करना मुश्किल हो सकता है। एक अच्छा तरीका यह हो सकता है कि आप पांच सेकंड तक उसकी एक आंख की तरफ, फिर पांच सेकंड तक दूसरी आंख की तरफ और उसके बाद पांच सेकंड तक मुंह की ओर अपनी नजरें करते रहें, यानी आपकी नजरें एक त्रिकोण में घूमती रह सकती हैं।

जब तर्क-वितर्क करना हो

तो जब आप किसी से तर्क-वितर्क कर रहे हों तो उसे टकटकी लगाकर देखते रहने से आपकी मजबूती पता चलती है। अगर तर्क करते समय आपकी नजरें कहीं और रहेंगी तो ऐसा माना जाएगा कि आप हार रहे हैं।

[दिनेश अग्रहरि]

हार की जीत

Posted By: Rajesh Niranjan