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'लोगों को शक था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन यह बन गया', नागपुर के कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत

Published: Sat, 25 Apr 2026 09:13 AM (IST)

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत निश्चित रूप से 'विश्वगुरु' बनेगा और देश के ...और पढ़ें

HighLights

  1. भारत निश्चित रूप से 'विश्वगुरु' बनेगा: मोहन भागवत।

  2. राम मंदिर की तरह भारत का भविष्य भी निश्चित।

  3. पश्चिमी सोच छोड़ भारतीय परंपराएं अपनाने का आह्वान।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि भारत निश्चित रूप से 'विश्वगुरु' बनेगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। साथ ही देश के भविष्य को लेकर किसी को भी कोई शक नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पहले लोगों को शक था कि राम मंदिर कभी बन पाएगा या नहीं, लेकिन वह बन गया। उसी तरह, भारत का 'विश्वगुरु' (दुनिया का शिक्षक) बनना भी निश्चित है।

भागवत शाम को नागपुर शहर के बाहरी इलाके में जामथा क्षेत्र में स्थित नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के परिसर में बन रहे 'भारत दुर्गा शक्ति स्थल' मंदिर की नींव रखने के बाद बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत के विश्वगुरु बनने का सपना लगातार प्रयासों और सामूहिक अनुशासन से ही पूरा होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसा बदलाव इसी पीढ़ी में देखने को मिल सकता है। संघ प्रमुख ने कहा कि भारत के भविष्य को लेकर जो भी शक हैं, उन्हें छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने कहा, "भारत के भविष्य पर शक मत करो। हिम्मत और आत्मनिर्भरता के साथ जियो और इन मूल्यों को अपने रोज़मर्रा के जीवन में अपनाओ। भारत मजबूत बनेगा और दुनिया का मार्गदर्शन करेगा। लोगों को शक था कि राम मंदिर बनेगा या नहीं, लेकिन वह बन गया। उसी तरह, भारत का विश्वगुरु बनना भी निश्चित है।"

उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि ऐसा होगा या नहीं। जो होना तय है, वह होकर रहेगा। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे लगातार कोशिशों से आखिरकार सफलता मिलती है। अगर हम अपने संकल्प के मुताबिक कदम-कदम पर काम करेंगे, तो भारत मजबूत, नेक और दुनिया का मार्गदर्शक बनेगा।

भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए लोगों को सबसे पहले 'भारत' को गहराई से समझना होगा और फिर उसे अपने रोजमर्रा के जीवन में अपनाना शुरू करना होगा।

उन्होंने कहा कि भारत माता की पूजा करने के लिए, हमें खुद 'भारत' बनना होगा । उन्होंने यह भी कहा कि देश को 150 सालों में विकसित हुई औपनिवेशिक या पश्चिमी सोच के नजरिए से नहीं, बल्कि उसके अपने ही सभ्यतागत मूल्यों के आधार पर समझा जाना चाहिए।

RSS प्रमुख ने नागरिकों से अपील की कि वे "पश्चिमी सोच की परतों" को उतार फेंकें और अपने विचारों तथा व्यवहार में भारतीय परंपराओं से फिर से जुड़ें। उन्होंने कहा कि यह बदलाव रोज़मर्रा की ज़िंदगी में छोटे-छोटे, लेकिन अहम बदलावों से शुरू होगा, जैसे कि भाषा, पहनावा, खाने-पीने की आदतें और सांस्कृतिक तौर-तरीके।

उन्होंने जोर देकर कहा, "भारत को रोजमर्रा की जिंदगी में जाना, अपनाया और जिया जाना चाहिए। सिर्फ आत्म-बोध की ऐसी प्रक्रिया से ही एक मजबूत और आत्मविश्वासी भारत का सपना पूरा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि भारत माता की पूजा का विचार सिर्फ रस्मों-रिवाजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें लोगों को अपनी ज़िंदगी में खुद को भारत के रूप में ढालना होता है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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