CEC के खिलाफ मुंबई में ठाकरे ब्रदर्स का प्रदर्शन शुरू, उद्धव बोले- आप तानाशाह पैदा करेंगे तो हम दफना देंगे
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया।
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शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे।
HighLights
उद्धव-राज ठाकरे ने मुंबई में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध मार्च किया।
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन रद्द करने की मांग उठाई।
सरकार पर 'मेक इन इंडिया' की आड़ में तानाशाही लाने का आरोप।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। रविवार को मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व किया। इसमें शामिल लोगों ने महाराष्ट्र में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) को रद करने की मांग की।
मार्च के बाद लोगों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने सरकार पर मेक इन इंडिया के नारे की आड़ में तानाशाही लाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
'तनाशाही दफनाने के लिए यहां जमा हुए हैं'
उन्होंने कहा, “आपको याद होगा कि जब मोदी जी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे तो मेक इन इंडिया का नारा दिया था। याद है? हम इसे मानते हैं। लेकिन अगर मेक इन इंडिया के तहत आप हमारे देश में एक तानाशाह भी बनाने जा रहे हैं तो हम आज उस तानाशाही को दफनाने और उसे खत्म करने के लिए यहां जमा हुए हैं।”
विरोध प्रदर्शन से पहले बात करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि यह प्रदर्शन उन कोशिशों के खिलाफ एक सामूहिक प्रतिक्रिया है, जिनसे लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है।
'ये 1857 वाला विद्रोह है'
उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यह विरोध देश में चल रहे हिटलर-जैसे शासन, चुनावों को हाईजैक करने, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को अपनी जेब में रखने, तानाशाही चलाने, वोट और चुनाव चुराने और सांसदों व विधायकों को तोड़ने के खिलाफ है। यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था।"
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ठाकरे ने कहा, “चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर मुझे संदेह है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति चुनाव के जरिए होनी चाहिए। पहले एक समिति होती थी जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता शामिल होते थे। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को इस समिति से हटा दिया। मुख्य न्यायाधीश की जगह उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा चुने गए एक मंत्री को नियुक्त किया। वह मंत्री अमित शाह हैं। अदालतों में लगातार सुनवाई हो रही है लेकिन कोई जवाबदेही नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा, “पहला सवाल यह है कि ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति कैसे हुई? क्या गृह मंत्रालय के पास किसी व्यक्ति के नागरिकता अधिकार रद करने की शक्ति है? वे ज्ञानेश कुमार के जरिए उस शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसीलिए हम ज्ञानेश कुमार को नहीं चाहते। पहले इंडिया अगेंस्ट करप्शन था और अब इंडिया अगेंस्ट वोट चोर है... बीजेपी को सरकार चलाना नहीं आता... जिस तरह से आप सरकार चला रहे हैं, वह शासन नहीं है। यह बदला लेने की भावना है।”
