'ऑपरेशन पूरा हुआ', टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद शूटर्स ने अपने हैंडलर्स को भेजी थी जानकारी
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए कथित हमले की जांच में सामने आया है कि यह एक सुनियोजित साजिश थी, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के हैंडलर्स की अहम भूमिका थी।

टाइगर पर हमले के बाद शूटर्स ने हैंडलर्स को दी थी जानकारी
HighLights
टाइगर श्रॉफ पर हमला सुनियोजित साजिश, हैंडलर्स की भूमिका।
लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े तीन आरोपी गिरफ्तार, कोटा से।
हमले से पहले वीडियो भेजा, 50 हजार रुपये एडवांस।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए कथित जानलेवा हमले की जांच जारी है। मामले की जांच करते हुए अधिकारियों ने बताया कि यह हमला पहले से ही पूरी योजना बनाकर किया गया गया। इसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े हैंडलर्स की अहम भूमिका थी।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी घटना से पहले और बाद में भी अपने हैंडलर्स के संपर्क में थे। वे उन्हें हमले से जुड़ी अपडेट दे रहे थे और उनसे आगे के निर्देश ले रहे थे।
राजस्थान से तीन आरोपी को किया गिरफ्तार
इस मामले में तीन आरोपियों को सोमवार को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किया गया। जिनकी पहचान बिहार और हरियाणा के निवासी के तौर पर हुई है। ऋतिक उर्फ रोशन बिहार के बेगूसराय, रेहान और फूल सिंह हरियाणा के रहने वाले हैं। इन सभी आरोपियों पर हत्या के प्रयास का आरोप है।
मुंबई पुलिस के अनुसार आरोपियों को सड़क मार्ग से मुंबई लाया गया है। मेडिकल जांच के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। इस मामले की जांच एंटी-एक्सटॉर्शन सेल कर रही है।
हैंडलर्स की पूरी घटना पर थी नजर
सूत्रों के मुताबिक इस पूरी घटना के दौरान आरोपी हैंडलर्स से संपर्क में थे और वारदात के तुरंत बाद बाइक से भागते ही हमलावरों ने अपने हैंडलर्स को बता दिया था कि काम पूरा हो गया है।
जांच में पता चला है कि कथित हैंडलर अनिल पंडित और उसके साथियों ने मीडिया में फायरिंग की खबर आने का इंतजार किया। जैसे ही घटना की खबरें सामने आईं, उन्होंने पुष्टि की कि हमला हो चुका है। इसके बाद उन्होंने पहले से तैयार करके रखा गया एक फेसबुक पोस्ट और एक ऑडियो क्लिप जारी कर दिया।
पुलिस को यह भी शक है कि फायरिंग करने से पहले हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ का फुटबॉल खेलते हुए एक छोटा वीडियो अपने हैंडलर्स को भेजा था। सूत्रों के मुताबिक, वीडियो मिलने के बाद ही हैंडलर्स ने हमलावरों को आगे बढ़ने का ग्रीन सिग्नल दिया था।
इस हमले को अंजाम देने के लिए तीनों आरोपियों को एडवांस के तौर पर कुल 50 हजार रुपये दिये गए थे। साथ ही काम सफलतापूर्वक पूरा होने पर उन्हें और पैसे देने का वादा भी किया गया था।
लॉरेंस गैंग से कनेक्शन की जांच
इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को शक है कि अनिल पंडित जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी है और इस साजिश में हैंडलर्स के नेटवर्क के जरिए जुड़ा हुआ था। कथित जानलेवा हमले की कोशिश के बाद, सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप सामने आई, जिसमें एक व्यक्ति ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से इस हमले की जिम्मेदारी ली।
रिकॉर्डिंग में, बोलने वाले ने अपना नाम अनिल पंडित बताया और हरमन संधू के साथ मिलकर इस हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा, 'मैं अनिल पंडित हूं। मैं लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई हूँ। आज टाइगर श्रॉफ के साथ जो कुछ भी हुआ, उसकी जिम्मेदारी हम लेते हैं - हरमन संधू और मैं।'
रिकॉर्डिंग में दावा किया गया कि टाइगर श्रॉफ को समझाने की कोशिश की थी लेकिन वह हमारी बात नहीं समझा। साथ ही उसने अभिनेता सलमान खान से जुड़े लोगों को भी धमकी दी।
ऑडियो क्लिप में बोलने वाले ने कहा, 'पूरी फिल्म इंडस्ट्री में, जो कोई भी हमारे साथ जुड़े बिना काम करेगा, या सलमान खान के साथ काम करेगा, उसे मार दिया जाएगा। यह पहली और आखिरी चेतावनी है।'
अनिल पंडित से कैसे मिले आरोपी
आरोपी से शुरुआती पूछताछ में जांचकर्ताओं को कई अहम जानकारियां मिली हैं। सूत्रों के अनुसार, करीब 2 महीने पहले रेहान और उसके साथी फूल सिंह ने अमृतसर में एक बिजनेसमैन को डराने-धमकाने के लिए उस पर फायरिंग की थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि इसी घटना के बाद रेहान, अनिल पंडित के संपर्क में आया।
सूत्रों का दावा है कि बाद में पंडित ने रेहान को टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने के लिए 35,000 रुपये एडवांस दिए, और बाकी पैसे हमले के बाद देने का वादा किया। उसने रेहान को विदेश भेजने में मदद करने का भी वादा किया था।
अधिकारियों का यह भी दावा है कि रेहान ने ऋतिक को इस हमले में शामिल होने के बदले 35,000 रुपये और विदेश में नौकरी दिलाने का लालच दिया था।
आरोपी के पास मिले सबूत
आरोपियों के पास एक बैग मिला, जिसमें तीनों व्यक्तियों के लिए कपड़े रखे हुए थे। जांचकर्ताओं ने दो आरोपियों के पास से एक-एक मोबाइल फोन भी बरामद किया। तीसरे आरोपी ने कथित तौर पर घटना के बाद सफर के दौरान अपना फोन फेंक दिया था।
पुलिस बरामद किए गए मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजना चाहती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हमला करने से पहले हमलावरों ने किन जगहों की रेकी (निगरानी) की थी और इस दौरान उन्होंने कौन सी तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड किए थे।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बिश्नोई गैंग के किन सदस्यों को ये तस्वीरें और वीडियो भेजे गए थे, और इन्हें शेयर करने के लिए किन एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया था।
अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से इस बारे में अहम जानकारी मिल सकती है कि हमले से पहले और बाद में वे अपने हैंडलर्स के कितने संपर्क में थे।
सीसीटीवी फुटेज की जांच जारी
मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस टीमें पिछले कई हफ्तों से फुटबॉल ग्राउंड और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही हैं। इसका मकसद आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाना और यह तय करना है कि क्या उन्होंने हमले से पहले इलाके की रेकी की थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, कुछ फुटेज में आरोपी कथित तौर पर इलाके की रेकी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस फुटेज की जांच करके ऐसे अन्य संदिग्ध लोगों की भी पहचान करने की कोशिश कर रही है, जो घटना से पहले ग्राउंड पर आए हो सकते हैं।
साथ ही जांचकर्ता टाइगर श्रॉफ की दिनचर्या और उन लोगों के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं जिन्हें उनकी गतिविधियों खासकर सार्वजनिक कार्यक्रमों और इवेंट्स से जुड़े उनके शेड्यूल की जानकारी हो सकती थी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस जानकारी से आरोपियों को हमला प्लान करने में मदद मिली होगी।
