'अल्बानिया सुप्रीम कोर्ट में आगजनी से सीखे भारत', संजय राउत की पोस्ट पर बवाल, प्रियंका चतुर्वेदी और BJP ने एक सुर में लताड़ा
संजय राउत के अल्बानिया विरोध प्रदर्शनों से भारत को सीखने वाले बयान पर प्रियंका चतुर्वेदी और भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है।
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संजय राउत के बयान पर बवाल

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। पूर्व राज्यसभा सांसद और शिवसेना (UBT) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मंगलवार को अपनी ही पार्टी के सहयोगी संजय राउत की उस बात से असहमति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को अल्बानिया में छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों से सबक लेना चाहिए।
इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया था और इनमें लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बनाया गया था। राउत ने दावा किया था कि अल्बानिया के लोगों ने देश के सुप्रीम कोर्ट में इसलिए आग लगा दी, क्योंकि उन पर भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद करने का आरोप था।
अल्बानिया से सीखें भारत: राउत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में राउत ने कहा, 'अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया। लोग इसलिए गुस्से में थे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शनकारी जनता ने संसद, सरकारी कार्यालयों और मंत्रियों के घरों पर भी हमले किए।'
उन्होंने आगे कहा, 'सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। खासकर भारत को।' हालांकि, चतुर्वेदी ने इन टिप्पणियों की निंदा की और कहा कि भारत को किसी दूसरे देश से सीखने की कोई जरूरत नहीं है।

प्रियंका के राउत को लताड़ा
चतुर्वेदी ने कहा, 'भारत को किसी दूसरे देश से सीखने की जरूरत नहीं है। अल्बानिया एक छोटा सा देश है, जिसने कई सालों तक कम्युनिस्ट तानाशाही झेली है।
यह विचार कि लोग कानून अपने हाथ में लें, व्यवस्था बिगाड़ें और संस्थाओं को अस्थिर करें - चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो या संसद - पूरी तरह से अस्वीकार्य है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जो लोग यह सुझाव देते हैं कि हमें सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश के विरोध-प्रदर्शनों से प्रेरणा लेनी चाहिए, वह बेहद अफसोसजनक है। ये विरोध-प्रदर्शन केवल छात्रों के नेतृत्व में नहीं थे; बाद में इन पर एक इस्लामी आंदोलन का कब्जा हो गया, जिसके कारण अल्पसंख्यकों जिनमें हिंदू अल्पसंख्यक भी शामिल हैं पर हमले हुए।
किसी भी लोकतंत्र में इस तरह के हिंसक सत्ता परिवर्तन की कोई जगह नहीं है। हमें अल्बानिया, पेरिस या ऐसी ही अन्य घटनाओं से कोई सीख लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।'
भाजपा ने की तीखी आलोचना
भाजपा ने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की टिप्पणी की भी कड़ी आलोचना की। सोमवार को 'एक्स' पर मराठी भाषा में किए गए एक पोस्ट में, राउत ने अल्बानिया में आगजनी की एक कथित घटना का 13 सेकंड का वीडियो क्लिप शेयर किया।
उन्होंने कहा कि सभी देशों को और खासकर भारत को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। अपनी पोस्ट में देश का नाम लेने के बजाय, शिवसेना (यूबीटी) नेता ने भारत को दर्शाने के लिए राष्ट्रीय ध्वज के इमोजी का इस्तेमाल किया।
राउत की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने कहा, 'विपक्ष के नेता कभी-कभी भारत में 'सत्ता परिवर्तन' लाने की बात करते हैं। कभी-कभी वे कहते हैं कि बांग्लादेश ने हमें रास्ता दिखाया है।
अब संजय राउत का यह बयान आया है कि भारत को अल्बानिया से सीखना चाहिए, वही अल्बानिया, जहां सड़कों पर फैली भारी अराजकता के बीच सुप्रीम कोर्ट में आग लगा दी गई थी।' उन्होंने आगे कहा, 'भारत में विपक्ष के नेता देश के लोकतंत्र को अराजकता की ओर धकेलना चाहते हैं; इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ नहीं हो सकता।'

अल्बानिया में क्या हो रहा है?
यह सब अल्बानिया में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हो रहा है, जहां प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को निशाना बनाया है और कई जगहों पर आग लगा दी है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट का कुछ हिस्सा भी शामिल है।
छात्रों के नेतृत्व में हो रहे इन प्रदर्शनों को कथित भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा के खराब स्तर को लेकर जनता के गुस्से से और बढ़ावा मिला है।
पुलिस ने बताया कि इन विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े आपराधिक मामलों में 388 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। इस दौरान कई पुलिस अधिकारी और प्रदर्शनकारी घायल भी हुए हैं।
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