यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 25, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कोर्ट में महिलाएं न संवारे बाल, भटकता है ध्यान- पुणे बार एसोसिएशन की नोटिस पर बवाल, लिया गया वापस
पुणे की जिला अदालत ने महिला वकीलों को लेकर एक नोटिस जारी किया था जिसमें कहा गया था कि महिला ...और पढ़ें

पुणे, एजेंसी। पुणे की जिला अदालत (Pune District Court) की रजिस्टार की ओर से महिलाओं को लेकर एक नोटिस जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि महिला वकील कोर्ट में अपने बाल संवारती हैं जिससे कथित तौर पर ध्यान भटकता है और कोर्ट का कामकाज प्रभावित होता है इसलिए महिला वकील कोर्ट परिसर में अपने बाल न संवारे। इस पर बवाल शुरू होते ही रजिस्टार ने यह नोटिस वापस ले लिया। इस नोटिस का फोटो इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ।
महिलाओं के बाल संवारने से रूकता है कामकाज
इसमें कहा गया, ऐसा देखा गया है कि महिलाएं कोर्ट में जब बाल संवारती हैं तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, कोर्ट के कामकाज पर इसका असर पड़ता है इसलिए महिला वकीलों को कोर्ट में बाल संवारने से मना किया जा रहा है।
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बार एसोसिएशन ने नोटिस का किया खंडन
इधर, पुणे बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट पांडुरंग थोर्वे (Pandurang Thorve) के मुताबिक, अगर रजिस्ट्रार कार्यालय से कोई नोटिस जारी किया जाता है, तो यह सबसे पहले पुणे बार एसोसिएशन को भेजे जाते हैं। सोशल मीडिया पर जिस नोटिस का फोटो वायरल हुआ है ऐसा कोई नोटिस उनके ऑफिस को नहीं मिला है।
थोर्वे ने इस बात की पुष्टि की कि दिवाली की छुट्टियां शुरू होने से पहले 20 अक्टूबर को वह खुद कोर्ट में मौजूद थे और उन्होंने ऐसा कोई नोटिस नहीं देखा। वह कहते हैं कि पैनल में खुद पांच महिलाएं हैं, किसी ने इस नोटिस को लेकर कोई शिकायत नहीं की।
Success at last, the notice had been withdrawn
Thank you everyone https://t.co/QfM9vgWMgv
— Indira Jaising (@IJaising) October 24, 2022
वरिष्ठ वकील इंदिरा ने शेयर की नोटिस की तस्वीर
इस बीच, 23 अक्टूबर को वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह (Indira Jaising) ट्विटर पर नोटिस की फोटो शेयर करते हुए लिखती हैं, 'वाह अब देखिए जरा महिला वकीलों की वजह से किनका ध्यान भटक रहा है और क्यों!' इसके बाद एक अन्य पोस्ट में वह लिखती हैं, 'आखिरकार सफलता मिली, नोटिस वापस ले लिया गया है। सबका शुक्रिया।'
