विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

नाना पाटेकर का जिस गांव में बीता बचपन, दोस्तों ने सुनाए अनसुने किस्से

Published: Thu, 08 Oct 2026 07:10 PM (IST)

बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिससे सिनेमा जगत और उनके पैतृक गांव मुरुड में शोक की लहर है।

मुरुड के ग्रामीणों ने सुनाए नाना पाटेकर के बचपन के किस्से (फाइल फोटो)

मुरुड के ग्रामीणों ने सुनाए नाना पाटेकर के बचपन के किस्से (फाइल फोटो)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को गोवा स्थित उनके घर पर 75 साल की उम्र में निधन हो गया। नाना पाटेकर के निधन से सिनेमा जगत में शोक की लहर है, साथ ही उनके पैतृक गांव, महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के तटीय गांव मुरुड, में सन्नाटा पसर गया है।

मुरुड के लोगों, उनके बचपत के दोस्तों और रिश्तेदारों ने उन्हें एक ऐसे इंसान के तौर पर याद किया, जिनका दिल बेहद साफ था और जो सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी कभी अपनी जड़ों को नहीं भूले।

प्राइमरी स्कूल से हुई थी शुरुआत

नाना पाटेकर का बचपन मुरुड की गलियों और समंदर के किनारों पर बीता। उन्होंने मुरुड नगर परिषद प्राइमरी स्कूल नंबर 4 में पहली से चौथी कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बाद वे आगे क पढ़ाई और जीवन के संघर्ष के लिए करीब 120-130 किलोमीटर दूर मुंबई चले गए।

हालांकि, मुंबई पहुंचकर जबरदस्त पहचान बनाने के बावजूद मुरुड से उनका जुड़ाव हमेशा बना रहा।

बुजुर्ग ने सुनाए नाना के बचपन के किस्से

गांव के बुजुर्ग चंद्रकांत सखाकर ने नाना पाटेकर के बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके पोते बाला सखाकर और नाना बहुत अच्छे दोस्त थे। चंद्रकांत ने बताया, हर शाम वे किनारे पर आने वाली छोटी मछुआरों की नावों को देखा करते थे। मैं उनसे नावों से पानी निकालने को कहता था।

एक बार जब नाना ने मछली पकड़ने जाने की जिद की, तो हमने एक इंडियन सैल्मन मछली पकड़ी। नाना उसे बड़े चाव से अपने कंधे पर लादकर घर ले गए थे।

स्कूल में उनसे दो साल सीनियर रहे एक दोस्त ने बताया कि वे हमेशा मिलनसार रहे। उन्होंने याद किया कि जब नाना पाटेकर मशहूर एक्ट्रेस दीप्ति नवल के साथ मुरुड आए थे, तो वे पद्मदुर्ग किला देखना चाहते थे। दोस्त उन्हें छोटी नाव से समुद्र के बीच बने उस ऐतिहासिक किले तक ले गए थे।

बड़े स्टार होने का नहीं था अहंकार

गांव वालों के अनुसार, नाना कभी बड़े स्टार होने का अहंकार नहीं रखते थे। उनके सीनियर दोस्त ने बताया कि पिछले साल ही वे पुणे स्थित नाना के फार्महाउस गए थे। नाना ने उनसे इस साल भी मिलने का वादा लिया था और हमेशा यही कहते थे कि उन्हें सिर्फ उनके नाम से ही बुलाया जाए, किसी औपचारिकता की जरूरत नहीं है।

मुरुड में भोजनालय चलाने वाले विजय पाटिल ने बताया कि नाना हमेशा गर्व से कहत थे कि वे मूल रूप से मुरुड के हैं। रोहा में एक कार्यक्रम के दौरान, जहां दिवंगत एनसीपी नेता अजीप पवार भी मौजूद थे, नाना ने साफ कह दिया था कि वे खाना खाने सिर्फ विजय पाटिल के रेस्टोरेंट ही जाएंगे।

नाना पाटेकर के कजिन श्रीकांत सर्वे बताते हैं कि वे परिवार के हर सदस्य की परवाह करते थे। सभी का हाल-चाल पूछते थे और अपने भाइयों का ख्याल रखते थे। सर्वे की मां, पाटेकर के पिता की बड़ी बहन थीं। मुरुड में आज भी उनकी प्रॉपर्टी मौजूद है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- 'मैंने 12 मण लकड़ी रखी है; इतनी ही लगेगी मुझे...': नाना पाटेकर के वो डायलॉग्स, जो हंसाते हुए भी सोचने पर मजबूर करते हैं