मुंबई: बैलार्ड एस्टेट में दूसरे विश्व युद्ध के समय के बंकर का होगा कायाकल्प, बनेगा नया टूरिस्ट स्पॉट
मुंबई के बैलार्ड एस्टेट में दूसरे विश्व युद्ध के एक बंकर को मनोरंजन केंद्र और फूड कोर्ट के रूप में ...और पढ़ें

बैलार्ड एस्टेट में मौजूद दूसरे विश्व युद्ध के जमाने का एक बंकर।
HighLights
मुंबई के बैलार्ड एस्टेट में मौजूद बंकर का होगा पुनर्विकास
मनोरंजन केंद्र और फूड कोर्ट के रूप में विकसित किया जाएगा
विरासत प्रेमियों ने बंकर के संरक्षण पर चिंता जताई
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई के बैलार्ड एस्टेट में एसएस रामगुलाम मार्ग पर मौजूद दूसरे विश्व युद्ध के जमाने का एक बंकर, एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल, आर्ट डेको करफ्यूल पेट्रोल पंप के पीछे छिपे, इस बंकर के आस-पास की जमीन पर फिर से विकास का काम शुरू किया गया है। फोर्ट के एडवर्डियन नियोक्लासिकल इलाके में बनी यह इमारत, 75 साल से भी ज्यादा समय से जमीन के एक छोटे से टुकड़े पर मौजूद है, जिसे अब एक मनोरंजन केंद्र और फूड कोर्ट के तौर पर विकसित किया जा रहा है।
यह बंकर मुंबई में ऐसी गिनी-चुनी इमारतों में से एक है, जिसकी हालत अब भी अच्छी है। इसमें नीचे जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। हालांकि, इसके निचले हिस्से के ज्यादातर हिस्से को गलत इस्तेमाल से बचाने के लिए एक दीवार बनाकर बंद कर दिया गया है। बता दें कि, ऐसे कई बंकर एंटॉप हिल और सायन में भी मौजूद हैं।
फूड कोर्ट के साथ बनेगा मनोरंजन क्षेत्र
मालूम हो कि, यह जमीन मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (MbPT) की है, जिसने इसे एक सार्वजनिक जगह के तौर पर फिर से विकसित करने के लिए लीज पर दिया है। MbPT ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक टेंडर जारी किया था। इसका मकसद नागरिकों के लिए एक बगीचे और फूड कोर्ट के साथ एक मनोरंजन क्षेत्र विकसित करना है। यह एक पुरानी इमारत है, और इसके आस-पास ही सारी लैंडस्केपिंग (हरियाली और सजावट) की योजना बनाई जा रही है।
हालांकि, अभी तक इस प्रोजेक्ट में इमारत की मरम्मत शामिल नहीं है, लेकिन इसे कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाया जाएगा। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC), जिसके बारे में शुरू में माना जा रहा था कि, वह भी इस काम में शामिल है, उनके अधिकारी ने कहा कि, चूंकि हमें इस काम के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए हमने इस जगह का मुआयना किया। जांच में पता चला कि यह जमीन MbPT की है। इसीलिए इस प्रोजेक्ट से उनका कोई लेना देना नहीं है।

शहर के लोगों की राय
एक विरासत प्रेमी ने कहा, "मुझे बंकर की यह हालत देखकर दुख होता है। हो सकता है कि इसे तोड़ भी दिया जाए। भले ही यह छोटा सा हो, लेकिन यह मुंबई और दूसरे विश्व युद्ध के बीच के जुड़ाव को दिखाता है। ऐसी इमारतों को आने वाली पीढ़ियों के लिए संभालकर रखा जाना चाहिए।"
वहीं, एक और विरासत प्रेमी ने बताया कि, "1920 के दशक में, बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट (BPT) ने एलेक्जेंड्रा डॉक बनाते समय समुद्र तल से जो चट्टानें निकाली थीं, उनका इस्तेमाल समुद्र से जमीन वापस पाने के लिए किया गया था। BPT ने इस जमीन का इस्तेमाल बैलार्ड एस्टेट को विकसित करने के लिए किया। यह शहर का पहला खास बिजनेस जिला था, जहां अलग-अलग कंपनियों को लीज पर प्लॉट दिए गए थे।"
"इस इलाके का लेआउट और डिजाइन आर्किटेक्ट जॉर्ज विटेट ने लंदन में उस समय के एडवर्डियन स्टाइल के हिसाब से तैयार किया था। बैलार्ड एस्टेट का विश्व युद्धों से गहरा नाता है। दूसरे विश्व युद्ध के बंकर का इस्तेमाल कई सालों तक निर्माण के मलबे को फेंकने की जगह के तौर पर किया जाता रहा। हाल ही में, इस जगह की सफाई की गई है और इसके चारों ओर बाड़ लगाई गई है। मुझे उम्मीद है कि इसे विशेषज्ञों की देखरेख में फिर से ठीक किया जा रहा है, ताकि हम विकास की आड़ में किसी और ऐतिहासिक जगह को न खो दें।"
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