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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mumbai Rain: मौसम विभाग ने इन शहरों के लिए जारी किया येलो अलर्ट, जानें मानसून के बाद भी क्‍यों हो रही बारिश

By Jagran NewsEdited By: Arijita Sen
Published: Mon, 10 Oct 2022 09:39 AM (GMT+05:30)

मौसम विभाग ने बताया है कि मुंबई में अभी बारिश का दौर जारी रहेगा। विभाग ने बारिश की शंका जताते ...और पढ़ें

मौसम विभाग ने महाराष्‍ट्र के इन शहरों के लिए जारी किया येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने महाराष्‍ट्र के इन शहरों के लिए जारी किया येलो अलर्ट

मुंबई, मिड डे। मुंबई में जमकर बारिश हो रही है इससे यहां का जन जीवन काफी प्रभावित हुआ है। शहर के कई हिस्‍सों में जलभराव हो गया है जिसका असर यातायात पर देखने को मिल रहा है। लगातार हो रही बारिश की वजह से जहां एक तरफ जहां अंधेरी सब वे में यातायात ठप्‍प हैं, वहीं सेंट्रल रेलवे ने अपने जोन में लोकल ट्रेनों की रफ्तार धीमी कर दी है।

मौसम विभाग ने बीते दिनों भारी बारिश की शंका जताते हुए मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए येलो अलर्ट जारी किया। यहां गरज के साथ हल्‍की से मध्‍यम श्रेणी की बारिश दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है।

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क्‍यों हो रही इतनी बारिश

आमतौर पर मानसून का मौसम सितंबर के आखिर तक बना रहता है। लेकिन मानसून के लौट जाने के बावजूद भी इतनी तेज बारिश होने के पीछे का कारण ला नीनो इफेक्‍ट को बताया जा रहा है। इसके चलते भारत में लगातार चौथे वर्ष मानसून के लिए तय समय के बाद भी सामान्‍य से अधिक बारिश हो रही है।

मालूम हो कि प्रशांत महासागर की समुद्री सतह के तापमान में जैसे-जैसे बदलाव देखने को मिलता, दुनिया में मौसम का रूख भी वैसे-वैसे बदलता जाता है। इसके दो इफेक्‍ट होते हैं, एक है अल नीनो और दूसरा ला नीनो।

जानें क्‍या है अल और ला लीनो

अल नीनो की वजह से तापमान गर्म हो जाता है और ला नीनो के कारण बारिश अधिक होती है, ठंड ज्‍यादा पड़ती है। इन दोनों का क्रम नौ से बारह महीने के अंतराल में चलता रहता है। ला नीनो में प्रशांत महासागर की सतह का तापमान काफी ठंडा हो जाता है इसका असर भारत के मानसून पर पड़ता है। भारत में कितनी बारिश, कब तक होगी, ठंड कितना पड़ेगा, ये सारा कुछ ला लीनों पर निर्भरशील है।

वहीं,अल नीनो में प्रशांत महासागर में असामान्‍य रूप से गर्म पानी की उपस्थिति देखने को मिलती है। इस दौरान पानी के तापमान में सामान्‍य से चार-पांच डिग्री सेल्सियस अधिक देखने को मिलती है। इसके प्रभाव से कम बारिश वाले क्षेत्रों में अधिक और अधिक वाले क्षेत्र में कम बारिश होती है।

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