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'SIR में स्थानीय कर्मचारियों को मिलें ज्यादा अधिकार', महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी की EC को चिट्ठी

Published: Tue, 29 Sep 2026 11:30 AM (IST)

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर ECINet सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग की है, ताकि स्थानीय अधिकारियों को 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' मामलों में अधिक अधिकार मिलें।

महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी की EC को लिखा लेटर(फोटो: सोशल मीडिया)

महाराष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी की EC को लिखा लेटर(फोटो: सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, मुंबई। चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। पत्र में मतदाता सूची के एसआईआर के नोटिस चरण के दौरान इस्तेमाल होने वाले ECINet सॉफ्टवेयर में चार अहम बदलाव करने की मांग की गई है।

महाराष्ट्र के CEO की यह मांग चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा पहले उठाए गए सवालों से मेल खाती है, जिन्होंने मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों की शक्तियों में केंद्रीय हस्तक्षेप का मुद्दा उठाया था।

क्या है लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी?

महाराष्ट्र में SIR का नोटिस चरण चल रहा है। इस दौरान सॉफ्टवेयर द्वारा कई मामलों को लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के रूप में चिह्नित किया जाता है। यह विसंगति तब सामने आती है जब ECINet सॉफ्टवेयर किसी मतदाता को पिछली मतदाता सूची में उसके माता-पिता या दादा-दादी के रिकॉर्ड से जोड़ने की कोशिश करता है और नाम या उम्र का मिलान नहीं हो पाता।

इसका मतलब यह नहीं होता कि वह व्यक्ति फर्जी मतदाता है, बल्कि यह केवल रिकॉर्ड में बेमेल होने का मामला होता है। महाराष्ट्र के CEO ने मांग की है कि ऐसे मामलों में चुनाव पंजीकरण अधिकारियों को सुनवाई के बाद अंतिम फैसला लेने का अधिक अधिकार दिया जाए।

इसके अलावा, यदि ईआरओ जमा किए गए दस्तावेजों से संतुष्ट हैं, तो उन्हें मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित होने से छूट देने का अधिकार भी मिलना चाहिए।

सॉफ्टवेयर के कारण अधिकारियों की शक्तियां सीमित

कानून के मुताबिक, हर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची तैयार करने, आपत्तियों की सुनवाई करने और नाम जोड़ने या हटाने की पूरी जिम्मेदारी चुनाव पंजीकरण अधिकारी की होती है, जो एसडीएम स्तर के अधिकारी होते हैं।

हालांकि, मौजूदा सॉफ्टवेयर अत्यधिक केंद्रीकृत है और इसका नियंत्रण आयोग के महानिदेशक - आईटी (DG-IT) के पास सीमित कर दिया गया है।

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने 14 अगस्त को लिखे अपने नोट में भी यह सवाल उठाया था कि कानूनन सारी जिम्मेदारी ERO, DEO और CEO की है, लेकिन सॉफ्टवेयर के जरिए उनके अधिकारों पर केंद्रीकृत नियंत्रण थोप दिया गया है, जिससे वे अपने कानूनी कर्तव्यों का ठीक से पालन नहीं कर पा रहे हैं।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के अनुरोधों और अंदरूनी चिंताओं के बाद 26 सितंबर को पूर्ण चुनाव आयोग की बैठक हुई। इसके बाद आयोग ने एक बयान जारी कर महाराष्ट्र की मांगों को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।

आयोग ने ईआरओ को यह अधिकार दे दिया है कि वे लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाले मामलों में मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई से छूट दे सकते हैं। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यों के सीईओ से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई सुधार किए जा चुके हैं और यदि फील्ड अधिकारियों को आगे भी किसी लचीलेपन की जरूरत होगी, तो उसे लागू किया जाएगा।

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट लिस्ट से 2 करोड़ से ज्यादा नाम हटे

31 अगस्त को जारी महाराष्ट्र की मसौदा मतदाता सूची में राज्य के मतदाताओं में 21.1 प्रतिशत की बड़ी कटौती दर्ज की गई है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने बताया कि SIR प्रक्रिया के तहत मसौदा मतदाता सूची से दो करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश नाम मृत या अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के हैं। राज्य की अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

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