एडमिशन, हॉस्टल और काउंसलिंग... महाराष्ट्र में सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए बड़ा फैसला; हर तरह से सपोर्ट करेगी सरकार
महाराष्ट्र सरकार सिंगल मदर्स के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए बड़ा फैसला ले रही है। यूनिवर्सिटी एडमिशन फॉर्म में इन बच्चों के लिए एक अलग कॉलम रखा जाएगा।

सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए महाराष्ट्र सरकार लेने जा रही बड़ा फैसला (AI जेनरेटेड फोटो)
HighLights
सिंगल मदर्स के बच्चों के लिए एडमिशन फॉर्म में अलग कॉलम।
'SMCSS 2026' के तहत छात्रों को व्यापक सहायता मिलेगी।
काउंसलिंग, करियर गाइडेंस और रहने की सुविधा भी शामिल।
डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र सरकार सिंगल मदर्स के लिए बड़ा फैसले लेने पर विचार कर रही है। राज्य भर की यूनिवर्सिटी और उनसे जुड़े कॉलेजों में एडमिशन फॉर्म में सिंगल मदर्स के बच्चों की पहचान के लिए एक अलग कॉलम दिया जा सकता है।
सिंगल मदर्स के लिए यह फैसला काफी अहम साबित हो सकता है, जिससे वह किसी भी पारिवारिक हालात में अपने बच्चे की पढ़ाई छुड़वाने को मजबूर न हों।
सिंगल मदर्स ने राज्य के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे उनके बच्चों को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद मिल सकती है, खासकर उन परिवारों में जहां मां आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं है या शिक्षा का खर्च उठाने लायक कमाई नहीं करती है।
सिंगल मदर्स की पढ़ाई जारी रखने के लिए बड़ा फैसला
सिंगल मदर स्टूडेंट्स को संस्थागत तरीकों से मदद दी जाएगी, जिसमें इमोशनल काउंसलिंग, करियर और स्किल-डेवलपमेंट गाइडेंस और जरूरत पड़ने पर रहने की सुविधा शामिल है।
प्रस्तावित पॉलिसी, 'सिंगल मदर्स चिल्ड्रेन सपोर्ट स्कीम (SMCSS) 2026' का मकसद ऐसे स्टूडेंट्स के लिए एक व्यवस्थित सपोर्ट सिस्टम बनाना है और यह पक्का करना है कि पारिवारिक हालात उन्हें अपनी पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर न करें।
HSNC यूनिवर्सिटी की वाइस-चांसलर हेमलता बागला की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सोमवार को हायर एजुकेशन के डायरेक्टर शैलेंद्र देवोलंकर को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
सोमवार को हुई बैठक में इस रिपोर्ट की समीक्षा की गई। उच्च शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने एक बयान में कहा, 'सरकार छात्रों की जरूरतों और हालात को ध्यान में रखते हुए उनकी उच्च शिक्षा की यात्रा को आसान, सुरक्षित और ज्यादा सशक्त बनाने के लिए काम कर रही है।'
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक वाइस-चांसलर हेमलता बागला ने कहा, 'इसके लिए कभी कोई व्यवस्थित पॉलिसी या सिस्टम नहीं रहा है। कुछ कॉलेज शायद ऐसे स्टूडेंट्स को अनौपचारिक तरीके से मदद दे रहे होंगे, लेकिन पहचान, मैपिंग या मदद के लिए कोई एक जैसा सिस्टम नहीं रहा है।'
वाइस-चांसलर ने आगे कहा, 'अब मकसद इस प्रक्रिया को व्यवस्थित करना, स्टूडेंट्स की पहचान करना, उन्हें सरकारी स्कीमों और दूसरी उपलब्ध मदद के बारे में बताना और जहां भी उन्हें जरूरत हो, गाइडेंस देना है।'
हेमलता बागला ने कहा, 'हर स्टूडेंट को फाइनेंशियल मदद देने पर ही फोकस नहीं है। जरूरतें हर स्टूडेंट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती हैं। यह करियर गाइडेंस, इमोशनल सपोर्ट, रहने की जगह या डिजिटल एक्सेस में मदद या पढ़ाई जारी रखने में सहायता हो सकती है।'
