'We Will Do It', पीएम मोदी के सेवा भाव के 25 साल पूरे, विकसित भारत के लिए दिया नया नारा; ITLA ने बनाया फ्यूचर प्लान
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा गठित इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लाजिस्टिक्स अथारिटी (आईटीएलए) विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
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आईटीएलए विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा (जागरण ग्राफिक्स)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा परिवहन और लॉजिस्टिक्स के लिए एकीकृत प्राधिकरण बनाने की घोषणा एवं इसके अगले ही दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘वी विल डू इट’ का नारा दिया जाना महज एक संयोग नहीं है।
परिवहन और लाजिस्टिक्स क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लाजिस्टिक्स अथारिटी (आईटीएलए) बनाने का निर्णय विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित हो सकता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए ‘वी विल डू इट’ का विश्वास जताया है। इस लक्ष्य को जमीन पर उतारने के लिए तेज और कम लागत वाली परिवहन व्यवस्था जरूरी है।
आईटीएलए क्यों है महत्वपूर्ण?
आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रो. मनोज कुमार तिवारी के अनुसार, आईटीएलए का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यह अलग-अलग परिवहन साधनों को अलग-अलग देखने के बजाय उन्हें एक ही व्यवस्था के हिस्से के रूप में विकसित करने का रास्ता खोलेगी।
आईटीएलए को देश की परिवहन व्यवस्था के लिए शीर्ष संस्था के रूप में विकसित किया जाएगा। यह लंबी अवधि की योजना तैयार करने के साथ परियोजनाओं का मूल्यांकन, उनकी निगरानी, अनुसंधान और उनके प्रभाव का आकलन करेगी।
इसके साथ ही दस वर्ष या उससे अधिक की अवधि को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इससे सड़क, रेल, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं में बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
पीएम गतिशक्ति को मिलेगी रफ्तार
प्रो. तिवारी के मुताबिक, आईटीएलए को पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति की अगली कड़ी के रूप में देखा जा सकता है। पीएम गतिशक्ति के तहत करीब 1,800 डेटा लेयर को एक प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा चुका है।
अब आईटीएलए इस डिजिटल आधार का इस्तेमाल परियोजनाओं की योजना, मंजूरी, निर्माण और निगरानी को बेहतर बनाने में कर सकती है। इसका सीधा लाभ आम लोगों और कारोबारियों को मिलेगा।
मसलन, किसी फैक्ट्री से निकला सामान सड़क से रेलवे टर्मिनल, वहां से रेल के जरिये बंदरगाह और फिर समुद्री मार्ग से दूसरे देश तक पहुंचता है। यदि इन सभी साधनों के बीच बेहतर तालमेल होगा तो सामान को बार-बार उतारने-चढ़ाने और रास्ते में रोकने की जरूरत कम होगी।
मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, माल ढुलाई टर्मिनल और आधुनिक वेयरहाउस इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे। इससे देश की लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में भी मदद मिल सकती है।
भारत की लॉजिस्टिक्स कितनी है?
डीपीआईआईटी के लिए एनसीएईआर के आकलन के अनुसार भारत की लॉजिस्टिक्स लागत जीडीपी की करीब 7.97 प्रतिशत है। परिवहन को अधिक भरोसेमंद और समयबद्ध बनाने से कंपनियां उत्पादन, सामान के भंडारण और वितरण की बेहतर योजना बना सकेंगी।
इससे कारोबार करना आसान होगा और भारतीय उत्पाद वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। आईटीएलए के तहत प्रस्तावित नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी भी महत्वपूर्ण होगी। जीएसटीएन के ई-वे बिल, फास्टैग, वाहन और जीपीएस जैसी प्रणालियों से पहले ही बड़ी मात्रा में डेटा तैयार हो रहा है।
इन आंकड़ों को जोड़कर यह पता लगाया जा सकता है कि माल कहां से कहां जा रहा है, किन मार्गों पर जाम है और कहां परिवहन क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो रहा है। एआई की मदद से खाली लौटने वाले ट्रकों को माल उपलब्ध कराने और बेहतर मार्ग तय करने में भी मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री का ‘वी विल डू इट’ संकल्प
प्रो. तिवारी का मानना है कि आईटीएलए केवल परिवहन व्यवस्था को बेहतर नहीं बनाएगी, बल्कि नए रोजगार और कौशल के अवसर भी पैदा करेगी। डेटा एनालिटिक्स, एआई, जीआईएस, डिजिटल ट्विन, ऑटोमेशन और सप्लाई चेन प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ेगी।
ऐसे में आईटीएलए को केवल एक नई सरकारी संस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह सड़क, रेल, बंदरगाह, जलमार्ग, वेयरहाउस, तकनीक और मानव संसाधन को एक साथ जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री के ‘वी विल डू इट’ के संकल्प को वास्तविकता में बदलने के लिए ऐसी एकीकृत और कुशल परिवहन व्यवस्था विकसित भारत की मजबूत नींव बन सकती है।
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