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'सबसे पहले छात्रों की बात सुनी जाएगी', IIT बॉम्बे ने परीक्षा में नकल से जुड़े नियमों का ड्राफ्ट किया तैयार

Published: Wed, 07 Oct 2026 10:53 AM (IST)

आईआईटी बॉम्बे ने छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परीक्षा में नकल और गलत तरीकों के इस्तेमाल से निपटने के नियमों में बदलाव का ड्राफ्ट तैयार किया है।

आईआईटी बॉम्बे। (फाइल फोटो।)

आईआईटी बॉम्बे। (फाइल फोटो।)

डिजिटल डेस्क, मुंबई। इंडियन इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) बॉम्बे ने छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद परीक्षा के दौरान नकल और गलत तरीकों के इस्तेमाल के मामलों से निपटने के नियमों में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है।

प्रस्तावित नियमों के तहत गलत तरीकों का इस्तेमाल करते हुए पकड़े गए छात्रों के खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले छात्र का पक्ष सुना जाएगा, जिसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई के बारे में फैसला लिया जाएगा।

छात्रों को अपनी बात रखने का मिलेगा मौका

मौजूदा सिस्टम के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब परीक्षा के दौरान अनुचित साधनों का इस्तेमाल पकड़ा जाता है। नए ड्राफ्ट में एक ज्यादा स्पष्ट प्रक्रिया का प्रस्ताव है, जिसमें छात्रों को अपना पक्ष रखने का साफ मौका भी शामिल है। वाकोडे की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे में परीक्षा और अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं पर उठ रहे सवालों के बीच ये प्रस्तावित बदलाव सामने आए हैं।

छात्र की मौत के बाद संस्थान ने उठाया कदम

पिछले महीने 22 साल के एक छात्र की आत्महत्या से कैंपस में जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन हुआ था। मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन और चैटजीपीटी का इस्तेमाल करते हुए पकड़े जाने के कुछ ही घंटों बाद वाकोडे कैंपस के हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया था।

आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम ने परीक्षा के इनविजिलेटर सूर्यनारायण डूला के प्रति समर्थन जाहिर किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि छात्र ने बिना इजाजत के स्मार्टफोन रखा हुआ है और वह उसका इस्तेमाल कर रहा है तो उन्होंने संस्थान के नियमों का पालन किया।

परीक्षा हॉल के सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि इनविजिलेटर ने वाकोडे को एक तरफ बुलाया। काली टी-शर्ट पहने वाकोडे सबसे आगे की लाइन में बैठा था तभी प्रोफेसर उसके पास आए और बात की। CCTV फुटेज में दिखा कि छात्र अपनी जगह से उठा और उसने अपना मोबाइल फोन इनविजिलेटर को सौंप दिया।

वाकोडे और डूला के बीच कुछ देर तक बातचीत होती रही, जिसके बाद उसने अपना सामान समेटा और परीक्षा हॉल से चला गया। हालांकि, प्रदर्शनकारियों और छात्र के परिवार का आरोप था कि वाकोडे को कैंपस में संस्थागत उत्पीड़न और जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली।

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