बुर्के से स्कूल यूनिफॉर्म तक: मुंबई की गौशिया ने हौसले से बदली किस्मत, मां-बेटी साथ जाती हैं स्कूल
मुंबई में गौशिया शेख अपनी बेटी जैनब के साथ स्कूल जाती हैं। कम उम्र में शादी और माँ बनने के ...और पढ़ें
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बुर्के से स्कूल यूनिफॉर्म तक मुंबई की गौशिया ने हौसले से बदली किस्मत मां-बेटी साथ जाती हैं स्कूल (फोटो सोर्स- अदिति अलुर्कर)
HighLights
गौशिया शेख अपनी बेटी जैनब के साथ स्कूल जाती हैं।
कम उम्र में शादी के बाद 10वीं की पढ़ाई फिर शुरू की।
9वीं कक्षा में टॉपर रहीं, डॉक्टर बनने का है सपना।
अदिति अलुर्कर, मुंबई। मुंबई में एक ऐसी मां-बेटी की कहानी सामने आई है, जो हर दिन साथ-साथ स्कूल जाती हैं। बेटी जैनब अपनी कक्षा में पढ़ती है, जबकि उसकी मां गौशिया शेख खुद 10वीं की छात्रा हैं। दिलचस्प बात यह है कि जब जैनब की पैरेंट-टीचर मीटिंग होती है, तो गौशिया वहां मां बनकर जाती हैं और जब गौशिया की PTM होती है, तो उसमें उनके ससुराल वाले शामिल होते हैं।
गौशिया हर दोपहर अपना बुर्का उतारकर स्कूल यूनिफॉर्म पहनती हैं, दो चोटियां बनाती हैं और अपनी छोटी बेटी जैनब के साथ पास के स्कूल जाती हैं। शुरू में उनके ससुराल वाले इस फैसले को लेकर संकोच में थे, लेकिन अब पति और सास-ससुर हर PTM में उनके साथ मौजूद रहते हैं। गौशिया अपनी कक्षा की मॉनिटर भी हैं।
क्यों अहम हैं यह साल
यह साल गौशिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वह 10वीं की बोर्ड परीक्षा देने जा रही हैं। बाकी छात्रों की तरह वह भी देर रात तक पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन उनकी दिनचर्या अलग है। कम उम्र में शादी, एक बच्ची और घर की जिम्मेदारियों के बावजूद वह रोज स्कूल जाती हैं और पढ़ाई के लिए समय निकालती हैं।
आर्थिक परेशानियों के कारण गौशिया की पढ़ाई 8वीं के बाद छूट गई थी। कुछ सालों के गैप के बाद उनकी शादी कर दी गई। शादी के समय उनसे वादा किया गया था कि वह आगे पढ़ाई पूरी कर सकेंगी, लेकिन इसके बाद कोरोना महामारी और लॉकडाउन आ गया, जिससे उनकी पढ़ाई फिर रुक गई। इसी दौरान वह मां बनीं।
जब उन्होंने अपनी बेटी जैनब का दाखिला पास के स्कूल में करवाया, तभी उन्हें लगा कि यह उनके लिए भी पढ़ाई दोबारा शुरू करने का सही मौका है। उन्होंने स्कूल में दाखिला लिया और दोबारा किताबों से जुड़ गईं।
9वीं कक्षा में रहीं टॉपर
गौशिया की मेहनत का नतीजा यह है कि पिछले साल 9वीं में वह अपनी कक्षा की टॉपर रहीं। शिक्षक और साथी छात्र उनके प्रदर्शन से प्रभावित हैं। उन्हें वोकेशनल विषयों में कारपेंट्री, इलेक्ट्रिकल काम, बेसिक फर्स्ट-एड जैसे कौशल सीखने में भी खास रुचि है। उनका सपना डॉक्टर बनने का है।
गौशिया बताती हैं कि उनके नाना डायबिटीज से पीड़ित थे और उन्हें अक्सर सरकारी अस्पताल ले जाना पड़ता था। वहां उन्होंने देखा कि कई बार डॉक्टर मरीजों से ठीक व्यवहार नहीं करते। वह चाहती हैं कि भविष्य में डॉक्टर बनकर मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें।
गौशिया रोज सुबह 6 बजे उठती हैं, घर के काम निपटाती हैं और दोपहर तक स्कूल जाती हैं। शाम को परिवार के साथ समय बिताने और खाना बनाने के बाद वह रात 3 बजे तक पढ़ाई करती हैं। इस दौरान उनकी बेटी जैनब भी उनके पास बैठकर अपना होमवर्क करती है।
स्कूल में उनकी उम्र ज्यादा होने के बावजूद कभी किसी ने उनका मजाक नहीं उड़ाया। उल्टा, उनके सहपाठी उनका सम्मान करते हैं और ब्रेक के दौरान उनकी बच्ची का भी ध्यान रखते हैं।
कई चीजों को रिपेयर करना भी सीखा
स्कूल प्रशासन ने बताया कि दाखिले के समय गौशिया को बाहरी परीक्षाओं का विकल्प बताया गया था, लेकिन वह नियमित छात्र बनना चाहती थीं। स्कूल ने उनकी मदद की। पढ़ाई के साथ-साथ गौशिया ने इलेक्ट्रिकल स्विचबोर्ड, वॉशिंग मशीन ठीक करना और वायर रिपेयर करना भी सीखा है, जिसका इस्तेमाल वह घर में करती हैं।
उनके पति एक गिग-वर्कर हैं। ससुराल वाले भी अब उनके फैसले से खुश हैं। उनके ससुर अब्दुल रहमान शेख ने कहा, "हमें अच्छा लगता है कि गौशिया पढ़ रही है। वह जितना आगे जाना चाहती है, हम उसका पूरा साथ देंगे।"
