विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

UPI से पेमेंट करना कब तक रहेगा फ्री, क्या अब भुगतान करने पर लगेगा शुल्क?

Published: Thu, 05 Feb 2026 07:39 PM (IST)

वित्त मंत्रालय ने बैंकों और भुगतान कंपनियों की यूपीआई पर शुल्क लगाने की मांग खारिज कर दी है। सरकार ने ...और पढ़ें

अभी यूपीआई भुगतान को लेकर ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा बोझ (फाइल फोटो)

अभी यूपीआई भुगतान को लेकर ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा बोझ (फाइल फोटो)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पिछले एक वर्ष से यूपीआई भुगतान में लागत का मुद्दा उठा कर देश के बैंक व भुगतान की सुविधा देने वाली कंपनियां (पेटीएम, फोनपे आदि) की तरफ से यूपीआई के जरिए होने वाले भुगतान पर शुल्क लगाने की मांग को वित्त मंत्रालय ने एक तरह से सिरे से खारिज कर दिया है।

सरकार की मंशा साफ है कि आम उपयोगक्ताों व छोटे व्यापारियों के लिए अभी भी यूपीआई मुफ्त ही रहेगा। इस मंशा से ही आम बजट 2026-27 में यूपीआइ और रुपे डेबिट कार्ड लेनदेन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी की व्यवस्था की है ताकि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) मॉडल जारी रहे।

सरकार करती है भरपाई

एमडीआर के तहत सरकार डिजिटल भगुतान को लेकर बैंकों के वित्तीय बोझ के बड़े हिस्से की भरपाई करती है। पिछले बजट में इस मद में 437 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था लेकिन बाद में इसे बढ़ा कर 2,196 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

UPI (1)

साथ ही सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले बड़ी राशि के भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव को भी फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।वैसे सरकार के इस रुख से डिजिटल भुगतान को सफल बनाने में असली भूमिका निभा रहे बैंकों व पेमेंट गेटवे की भूमिका निभाने वाली फिनटेक कंपनियों में निराशा है।

यूपीआई अभी रोजाना 30 करोड़ से अधिक ट्रांजेक्शन प्रोसेस कर रहा है और यह राशि स्केलिंग, फ्रॉड रोकथाम तथा इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए अपर्याप्त मानी जा रही है। बैंकों व फिनटेक कंपनियों का कहना है कि उन्हें हर एक डिजिटल भुगतान पर औसतन दो रुपये की लागत आती है और मौजूदा व्यवस्था में इसकी भरपाई नहीं हो रही।

क्या कहता है RBI का डेटा?

दूसरी तरफ, डिजिटल भुगतान के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, बढ़ते फ्रॉड की रोकथाम के लिए, नये फीचर्स जोड़ने में और दूर-दराज के क्षेत्रों में इस सुविधा का विस्तार देने में उनकी लागत बढ़ती जा रही है। आरबीआई का डाटा बताता है कि 86 फीसद लेन-देन 500 रुपये से कम राशि की होती हैं। यह लागत को बढ़ाता है।

संबंधित कंपनियों के संगठन पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से बड़े व्यापारियों (टर्नओवर 10 करोड़ से अधिक) पर एक शुल्क लगाने की मांग की जा रही थी। इस बारे में इनकी आरबीआई की तरफ से गठित समिति के समक्ष प्रस्तुतीकरण भी दिया गया था।

डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले बड़े व्यापारियों से 0.2-0.3 फीसद की दर से अतिरिक्त शुल्क लगाने की मांग की गई थी। इन्होंने यह भी कहा था कि छोटे भुगतान और व्यक्तिगत तौर पर होने वाले लेन-देन पर शुल्क मुक्त बनाये रखने की बात कही थी।

मौजूदा व्यवस्था को ज्यादा दिनों तक चलाने में असमर्थता की बात भी कही गई थी। लेकिन सरकार ने उपयोगकर्ताओं पर कोई शुल्क नहीं लगाने का स्पष्ट संकेत दे दिया है। वित्त मंत्रालय और आरबीआइ के अधिकारियों का कहना है यूपीआई शुल्क बढ़ाने को लेकर अगर जरूरी होगा तो कुछ महीने बाद फिर से विमर्श किया जाएगा।

UPI (2)

रिकॉर्ड स्तर पर UPI की लोकप्रियता

सनद रहे कि भारत में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की लोकप्रियता और ट्रांजेक्शन की रफ्तार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। और इसमें और तेजी के पूरे आसार हैं। जनवरी 2026 में यूपीआई ने रिकॉर्ड 2,170 करोड़ लेन-देन दर्ज किए, जिनका कुल मूल्य 28.33 लाख करोड़ रुपये रहा।

यह दिसंबर 2025 के 2163 करोड़ ट्रांजेक्शन और 27.97 लाख करोड़ रुपये मूल्य से थोड़ा अधिक है। इस तरह से औसतन 70 करोड़ वित्तीय लेन-देन (91,403 करोड़ रुपये) रोजाना हो रहे हैं।

रोबोट बसाएंगे नई दुनिया? टेस्ला का Optimus दूसरे ग्रहों पर बनाएगा घर; एलन मस्क का बड़ा दावा