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त्विषा मौत केस में हाई कोर्ट में तीन घंटे तीखी बहस: गिरिबाला की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, CBI को भी बनाया पक्षकार

Published: Wed, 27 May 2026 05:55 PM (IST)Updated: Wed, 27 May 2026 08:26 PM (IST)

जबलपुर हाईकोर्ट ने ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में आरोपी गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर लंबी बहस के बाद ...और पढ़ें

पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में बहस।

पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत पर हाईकोर्ट में बहस।

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में आरोपित सास और पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत के खिलाफ दायर याचिकाओं पर बुधवार को जबलपुर हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई हुई। लगभग पौने तीन घंटे तक चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकलपीठ में हुई, जहां प्रदेश सरकार, मृतका के पिता और जांच एजेंसी की ओर से कई महत्वपूर्ण तर्क अदालत के समक्ष रखे गए।

सरकार और पीड़ित पक्ष ने उठाए गंभीर सवाल

प्रदेश सरकार और मृतका के पिता की ओर से दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि गिरिबाला सिंह अग्रिम जमानत की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं कर रही हैं। अदालत में कहा गया कि पुलिस द्वारा 13 से 23 मई के बीच कई नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को जांच एजेंसी तक उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया जा रहा है। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया कि जमानत मिलने के बाद साक्ष्यों से छेड़छाड़ या उन्हें प्रभावित करने की आशंका है।

CBI ने भी रखी दलील, हिरासत की जरूरत बताई

सुनवाई के दौरान सीबीआई ने इंटरविनर बनने के लिए आवेदन पेश करते हुए अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग का समर्थन किया। जांच एजेंसी की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले के कुछ पहलुओं की गहन जांच अभी बाकी है और आरोपितों से आमने-सामने पूछताछ के लिए उनकी अभिरक्षा आवश्यक हो सकती है। सीबीआई की ओर से पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े कुछ बिंदुओं को भी जांच के दायरे में बताया गया।

बचाव पक्ष ने दिए अलग तर्क

  • वहीं गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील द्वारा तर्क दिया गया कि त्विषा को डॉक्टरों ने एंजायटी, ड्रग्स के कारण उसकी स्थिति को देखते हुए गर्भपात की गोलियां दी थी।
  • त्विषा अकेले रहना चाहती थी और जिस मंजिल में उसने फांसी लगाई, वही उसका किचन, बाथरूम व बेडरूम था। घटना के दूसरे दिन 13 तारीख को पुलिस ने उसे सीज कर दिया था।
  • यह तर्क भी दिया गया कि गिरिबाला सिंह तथा उसके बेटे ने यूपीआई के माध्यम से शादी के बाद त्विषा को सात लाख रुपये से अधिक दिये है।
  • त्विषा ने कभी भी अपनी सास पर दहेज मांगने तथा प्रताड़ित करने की बात मायके पक्ष वालों से नहीं कही थी।
  • त्विषा के सभी आरोप अपने पति के खिलाफ है सास के खिलाफ नही। इसके अलावा वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं।

कोर्ट में इन्होंने की पैरवी

प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता व महाधिवक्ता प्रशांत सिंह, याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा तथा अनावेदिका की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रामा कृष्णन पैरवी के लिए उपस्थित हुए।

 

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