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सतना: वाहन जब्ती के विवाद में 'एपस्टीन फाइल' संग मोदी और हरदीप पुरी का भी जिक्र, उपभोक्ता आयोग ने कहा- तथ्यों पर करें बहस

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:16 PM (IST)

सतना में वाहन फाइनेंस विवाद की सुनवाई के दौरान 'एपस्टीन फाइल्स' का मुद्दा उठने पर जिला उपभोक्ता आयोग ने आपत्ति ...और पढ़ें

-तस्वीर एआई से निर्मित।

-तस्वीर एआई से निर्मित।

HighLights

  1. वाहन फाइनेंस विवाद में एपस्टीन फाइल्स का जिक्र।

  2. उपभोक्ता आयोग ने तथ्यों पर बहस करने को कहा।

  3. आवेदक की सेवा में कमी की शिकायत खारिज हुई।

डिजिटल डेस्क, सतना। वाहन फाइनेंस से जुड़े एक उपभोक्ता विवाद की सुनवाई के दौरान अमेरिकी कारोबारी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी चर्चित 'एपस्टीन फाइल्स' का मुद्दा उठने से जिला उपभोक्ता आयोग की कार्यवाही चर्चा में आ गई। आवेदक की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेते हुए मीडिया रिपोर्टों और तस्वीरों का हवाला दिया।

इस पर आयोग के अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि न्यायिक कार्यवाही में केवल प्रकरण से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही दलील दी जानी चाहिए। समाचारों के आधार पर असंबंधित टिप्पणियां करना उचित नहीं है।

यह मामला उपभोक्ता परिवाद क्रमांक 190/2024 से जुड़ा है। उदयसागर, कोठी निवासी कमलेश प्रसाद वर्मा ने सेफ मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। विवाद एक ऑटो वाहन (एमपी-19 आर-7829) की फाइनेंसिंग, किस्तों के भुगतान, वाहन जब्त करने और बाद में उसकी बिक्री को लेकर था।

बहस के दौरान एपस्टीन फाइल्स का जिक्र

आयोग के 28 अक्टूबर 2026 के आदेश के पैरा 13 में इस घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, आवेदक के अधिवक्ता श्यामकिशोर मिश्रा ने सुनवाई के दौरान एपस्टीन फाइल्स से संबंधित मीडिया में प्रसारित खबरों और तस्वीरों का हवाला दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर अपनी दलील रखी।

इस पर आयोग के अध्यक्ष श्यामाचरण उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि अखबारों या टेलीविजन पर प्रसारित खबरों के आधार पर इस तरह के निष्कर्ष निकालना न्यायिक कार्यवाही का उचित तरीका नहीं है। आदेश में प्रधानमंत्री के संबंध में की गई टिप्पणी को निराधार बताते हुए अधिवक्ता को आयोग के समक्ष इस तरह की भ्रांतियां फैलाने से बचने की हिदायत भी दी गई।

वाहन की किस्तें नहीं चुकाने पर जब्ती का दावा

मूल विवाद में कमलेश प्रसाद वर्मा का आरोप था कि किस्तों के भुगतान को लेकर विवाद के बाद मार्च 2022 में उनका ऑटो वाहन जब्त कर लिया गया। इसके बाद उनके खिलाफ 2,34,678 रुपये की वसूली की कार्रवाई शुरू की गई।

वहीं, फाइनेंस कंपनी का पक्ष था कि वाहन की किस्तों का नियमित भुगतान नहीं किया जा रहा था। बकाया राशि की वसूली के लिए नियमानुसार कार्रवाई करते हुए वाहन को 37,200 रुपये में बेच दिया गया और बिक्री से मिली रकम ऋण खाते में समायोजित कर दी गई। कंपनी के मुताबिक, इसके बाद भी 2,43,187.99 रुपये की राशि बकाया थी।

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आयोग ने सेवा में कमी के आरोप नहीं माने

दोनों पक्षों के दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आयोग ने पाया कि आवेदक की ओर से किस्तों का नियमित भुगतान साबित नहीं हुआ। आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि वाहन जब्त करने और उसकी बिक्री से पहले आवेदक को नोटिस दिए गए थे।

आयोग ने माना कि सेफ मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर से सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार साबित नहीं हुआ है। इसी आधार पर कमलेश प्रसाद वर्मा का परिवाद निराधार मानते हुए खारिज कर दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों को अपने-अपने वाद व्यय स्वयं वहन करने के निर्देश दिए।

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