विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

राजभवन के दस्तावेजों पर RTI को लेकर 15 साल की कानूनी लड़ाई, MP हाई कोर्ट बोला- पहले रिकॉर्ड देखिए, फिर कॉपी मांगिए

Published: Thu, 05 Nov 2026 04:14 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राजभवन के दस्तावेजों पर 15 साल पुरानी RTI लड़ाई में अहम फैसला सुनाया है। अब ...और पढ़ें

मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

मप्र हाईकोर्ट भवन (फाइल फोटो)

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने राजभवन RTI मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया।

  2. पहले दस्तावेजों का निरीक्षण, फिर प्रतियां मांग सकेंगे आवेदक।

  3. 15 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने दी अहम व्यवस्था।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश राजभवन से राज्यपाल द्वारा केंद्र सरकार को भेजी जाने वाली मासिक रिपोर्टों और केंद्र से मिलने वाले पत्रों व निर्देशों की जानकारी हासिल करने की 15 साल पुरानी कानूनी लड़ाई में हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत आवेदक को संबंधित अभिलेखों का पहले निरीक्षण करने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके बाद वह अपनी जरूरत के दस्तावेजों को चिह्नित कर उनकी प्रमाणित प्रतियां मांग सकता है।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने दो नवंबर 2026 को यह व्यवस्था देते हुए एकलपीठ के पूर्व आदेश में संशोधन किया। इस फैसले से आवेदक के लिए राजभवन के संबंधित रिकॉर्ड तक पहुंचने की प्रक्रिया स्पष्ट हो गई है।

2011 में मांगी थी राज्यपाल की रिपोर्टों की जानकारी

दरअसल, भोपाल निवासी अजय दुबे ने 12 दिसंबर 2011 को राजभवन सचिवालय के लोक सूचना अधिकारी के समक्ष आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था। इसमें एक जनवरी 2011 के बाद राज्यपाल की ओर से प्रदेश के शासन-प्रशासन और राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर केंद्र सरकार को भेजी गई मासिक रिपोर्टों की जानकारी मांगी गई थी।

इसके साथ ही इन रिपोर्टों के आधार पर भारत सरकार द्वारा राजभवन को भेजे गए पत्रों और निर्देशों से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए थे।

आवेदन अस्पष्ट बताकर कर दिया था खारिज

राजभवन के लोक सूचना अधिकारी ने 29 दिसंबर 2011 को आवेदन को अस्पष्ट बताते हुए निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ प्रथम अपील की गई। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 23 फरवरी 2012 को आवेदक को संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण करने और इसके बाद जरूरी दस्तावेजों की प्रतियां मांगने की अनुमति दे दी थी।

मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा, जहां 17 अगस्त 2015 को प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश को प्रभावी बनाए रखा गया। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

एकलपीठ के आदेश को युगलपीठ में दी चुनौती

मामले की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने 17 अगस्त 2026 को राज्य सूचना आयोग और प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश निरस्त कर दिए थे। साथ ही आवेदक को दस्तावेजों का स्पष्ट विवरण देते हुए 15 दिन के भीतर नया आरटीआई आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी थी।

इस आदेश से असंतुष्ट अजय दुबे ने रिट अपील दायर की। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद एकलपीठ के निर्देश में संशोधन करते हुए कहा कि आवेदक पहले लोक सूचना अधिकारी के समक्ष संबंधित अभिलेखों के निरीक्षण के लिए आवेदन कर सकता है।

यह भी पढ़ें- बर्फीले पहाड़ हों या बारूदी सुरंगें, हर चुनौती से निपटेगा स्वदेशी LAMV; जबलपुर में आकार ले रहा सेना का नया 'सुरक्षा कवच'

पहले फाइलें देख सकेंगे, फिर मांग सकेंगे प्रमाणित प्रतियां

हाई कोर्ट की व्यवस्था के मुताबिक, आवेदक को पहले उपलब्ध अभिलेखों का निरीक्षण करने का अवसर मिलेगा। निरीक्षण के दौरान वह अपनी जरूरत के दस्तावेजों की पहचान कर उन्हें चिह्नित कर सकेगा। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए आवेदन किया जा सकेगा।

आवेदक की ओर से अधिवक्ता राजेश कुमार चंद ने पैरवी की, जबकि शासन की तरफ से उप महाधिवक्ता विवेक शर्मा उपस्थित हुए।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।