'डॉक्टर भगवान नहीं, नोट छापने की मशीन बन गए', रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा का तीखा हमला; बोले- मेरा वश चले तो लाइसेंस रद करवा दूं
रीवा में खराब स्वास्थ्य सेवाओं पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने डॉक्टरों को ...और पढ़ें

रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा। (फाइल फोटो)
HighLights
सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों को 'नोट छापने की मशीन' कहा।
रीवा में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर जताई गहरी नाराजगी।
लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों के लाइसेंस रद करने की मांग।
डिजिटल डेस्क, रीवा। रीवा की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और सरकारी अस्पतालों में कथित लापरवाही को लेकर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों पर तीखा हमला बोला है। सोमवार को मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि डॉक्टर अब भगवान नहीं रहे, बल्कि नोट छापने की मशीन बन गए हैं। सांसद ने यहां तक कह दिया कि यदि उनके हाथ में होता तो वे सभी डॉक्टरों के लाइसेंस निरस्त करवा देते और उनका इलाज करने का अधिकार खत्म कर देते।
उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ चिकित्सक मरीजों की सेवा के बजाय पैसा कमाने में लगे हैं। ये डॉक्टर नहीं हैं, बल्कि नोट छापकर कोठियां बना रहे हैं। जनता अब इन्हें भगवान की तरह नहीं, बल्कि दानव के रूप में देखने लगी है।
सरकारी अस्पताल में ड्यूटी नहीं निभाने वालों पर हो कार्रवाई
जनार्दन मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस करने से कोई नहीं रोक रहा, लेकिन उन्हें सरकारी अस्पतालों में अपनी जिम्मेदारी भी पूरी ईमानदारी से निभानी चाहिए। सरकारी ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों को नौकरी से हटाया जाना चाहिए और उनकी निजी प्रैक्टिस पर भी रोक लगनी चाहिए।
सांसद ने स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है। उन्होंने राज्य सरकार से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की।
रीवा के अस्पतालों में लगातार सामने आ रहे विवाद
गौरतलब है कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला का विधानसभा क्षेत्र भी रीवा है। इसके बावजूद जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
अगस्त में संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला सामने आया था। अक्टूबर में गर्भवती दीपा गुप्ता और उनके गर्भस्थ शिशु की मौत को लेकर भी सवाल उठे। सितंबर में हुजूर क्षेत्र की मिथिलेश सिंह के कंधे के कथित गलत ऑपरेशन के बाद आत्मदाह की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
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अक्षत की मौत के बाद संजीवनी अस्पताल पर भी आरोप
अक्टूबर में खुटेही निवासी अक्षत शुक्ला की मौत का मामला भी चर्चा में रहा। उनके पिता सुभाष शुक्ला ने संजीवनी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि अस्पताल में महज 20 मिनट के भीतर अक्षत को टीबी की 14 गोलियां दे दी गईं, जबकि जांच रिपोर्ट में टीबी की पुष्टि नहीं हुई थी।
इन घटनाओं के बीच सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सकों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।
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