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जबलपुर के नरेंद्र कुमार नहीं रहे, लेकिन कई लोगों को दे गए जीवन दान

Published: Tue, 03 Nov 2026 01:52 AM (IST)

जबलपुर में नरेंद्र कुमार के ब्रेन डेड होने के बाद उनके अंगों को दान करने के लिए दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए।

कई लोगों की जिंदगियां रोशन कर गए नरेंद्र कुमार।

कई लोगों की जिंदगियां रोशन कर गए नरेंद्र कुमार।

HighLights

  1. जबलपुर में नरेंद्र कुमार के अंगदान हेतु दो ग्रीन कॉरिडोर बने।

  2. हृदय और लिवर अहमदाबाद एयरलिफ्ट, किडनी जबलपुर में प्रत्यारोपित।

  3. ब्रेन डेड नरेंद्र कुमार ने कई लोगों को दिया जीवनदान।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। संस्कारधानी सोमवार और मंगलवार आधी रात को एक बार फिर दो ग्रीन कॉरिडोर की साक्षी बनने जा रही है। मेट्रो हॉस्पिटल दमोहनाका से दो ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया रात 12:30 बजे शुरू हुई।

ब्रेन डेड के बाद जबलपुर के नरेंद्र कुमार की एक किडनी के लिए मेट्रो से मेडिकल कॉलेज तक ग्रीन कॉरिडोर बनेगा। जबकि दूसरी किडनी मेट्रो हॉस्पिटल में ही एक पात्र मरीज को ट्रांसप्लांट होगी।

सड़क हादसे में हुए थे घायल

प्राप्त जानकारी के अनुसार नरेंद्र कुमार का हार्ट और लिवर एयरलिफ्ट कर अहमदाबाद ले जाया जाएगा। इसके लिए दूसरा ग्रीन कॉरिडोर मेट्रो हॉस्पिटल से डुमना विमानतल तक बनने जा रहा है। इसके अलावा कॉर्निया और त्वचा मेडिकल कॉलेज में सुरक्षित रहेगी।

गुप्तेश्वर निवासी 40 वर्षीय नरेंद्र कुमार की एक सड़क हादसे में 31 अक्टूबर को गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद उन्हें मेट्रो अस्पताल लाया गया था लेकिन चिकित्सकों ने अथक प्रयास के बाद उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। परिवार के लोगों की सहमति से नरेंद्र कुमार के हार्ट, लीवर और किडनी अन्य को जीवनदान देने में सहायक होने जा रही है।

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अंगों के जीवित रहने और ट्रांसप्लांट की समय-सीमा

हार्ट : शरीर से निकलने के बाद हृदय को 4 से 6 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट किया जाना जरूरी होता है। समय सबसे अहम होता है।

लिवर : लिवर को निकालने के बाद आमतौर पर 8 से 12 घंटे (अधिकतम 15 घंटे) के अंदर मरीज में लगा देना चाहिए।

किडनी : किडनी सबसे लंबे समय तक सुरक्षित रह सकती है; इसे निकालने के बाद 24 से 36 घंटे के भीतर ट्रांसप्लांट किया जा सकता है।

कार्निया : निकालने के बाद, उसे 7 से 14 दिनों (विशेष रूप से सुरक्षित रखने की नई तकनीकों के साथ 2 सप्ताह / 14 दिन तक) के भीतर दूसरे मरीज को लगाया जा सकता है।

जबलपुर में कब-कब ग्रीन कारिडोर बना

(अंग प्रत्यारोपण के लिए)

24 जुलाई 2017: जबलपुर में पहली बार ग्रीन कारिडोर बनाया गया था। यह करीब 16 किलोमीटर लंबा था, जिसे अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक 18 मिनट में एम्बुलेंस द्वारा तय किया गया था।

22 सितंबर 2023: मध्य प्रदेश के इतिहास में पहला सबसे लंबा करीब 350 किलोमीटर का ग्रीन कारिडोर बनाया गया। इसके जरिए एक ब्रेन-डेड मरीज का लिवर सड़क मार्ग से रात में जबलपुर से भोपाल ले जाया गया था, जिसे 4 घंटे में पूरा किया गया।

7 मार्च 2025: नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती ब्रेन डेड मरीज (पूरन चौधरी) के अंगों (किडनी और त्वचा) के लिए जबलपुर में ग्रीन कारिडोर बनाया गया।

10 अगस्त 2025: मेडिकल कालेज जबलपुर से अहमदाबाद और भोपाल तक अंगों को पहुंचाने के लिए ग्रीन कारिडोर बनाया गया (अस्पताल से डुमना एयरपोर्ट तक का सफर करीब 20 मिनट में तय हुआ)।

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