MP के जंगलों में फिर दिखेंगे जंगली भैंसे: CM मोहन ने कांजीरंगा से लाए 8 भैंसों को कान्हा के बड़े बाड़े में मुक्त किया
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में विलुप्त हुए जंगली भैंसों को फिर से बसाने की पहल हुई है। सीएम ...और पढ़ें

जंगली भैंसों को सीएम मोहन यादव ने कान्हा अभयारण्य के बड़े बाड़े में छोड़ा। (सौजन्य- जनसंपर्क विभाग)
HighLights
कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की वापसी।
सीएम मोहन यादव ने 8 भैंसों को बड़े बाड़े में छोड़ा।
तीन साल में 50 भैंसों की आबादी का लक्ष्य।
डिजिटल डेस्क, बालाघाट। मध्य प्रदेश के जंगलों में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों को फिर से बसाने की दिशा में वन विभाग ने एक और कदम बढ़ाया है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व की सुपखार रेंज में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल के बड़े बाड़े में छोड़ा। अब तक इन्हें एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया था, ताकि वे मध्य प्रदेश की जलवायु और पर्यावरण के अनुकूल हो सकें।
करीब एक सदी बाद सुपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना की इस पहल को जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य इन वन्यजीवों को नए वातावरण में ढालकर धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक आवास में बसाना है। वन विभाग की योजना अगले तीन वर्षों में सुपखार क्षेत्र में कुल 50 जंगली भैंसों की आबादी विकसित करने की है।
दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे
जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से कुल आठ जंगली भैंसों को दो चरणों में मध्य प्रदेश लाया गया। इनमें छह मादा और दो नर शामिल हैं।
पहले चरण में 28 अप्रैल को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को सुपखार के एक हेक्टेयर के बाड़े में रखा गया था। इसके बाद 9 मई को तीन मादा और एक नर को वहां लाया गया। सभी आठ भैंसों को क्वारंटाइन अवधि के दौरान निगरानी में रखा गया, ताकि उनके स्वास्थ्य और नए वातावरण के अनुकूल होने की स्थिति पर नजर रखी जा सके।
अब क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद इन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया है। यह इनके प्राकृतिक वातावरण के करीब पहुंचने और आगे की पुनर्स्थापना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है।

तीन साल में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य
वन विभाग के अनुसार, मध्य प्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों की मौजूदगी लंबे समय से समाप्त हो चुकी थी। सुपखार क्षेत्र में पहले इनके पाए जाने के प्रमाण मिलने के बाद इस स्थान को पुनर्स्थापना के लिए चुना गया।
परियोजना के तहत अगले तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को यहां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उनके स्वास्थ्य, प्रजनन, भोजन, आवास और स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल होने की प्रक्रिया पर निगरानी जरूरी होगी।
जंगली भैंसों की वापसी से क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा मिलने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये भैंसे नए वातावरण में कितनी अच्छी तरह अनुकूलित होते हैं और उनकी आबादी किस तरह आगे बढ़ती है।
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सीएम बोले- मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण दिन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि करीब 100 वर्षों बाद सुपखार रेंज में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2,200 किलोमीटर की यात्रा तय कर इन आठ जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश लाया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुकी वन्यजीव प्रजातियों को फिर से स्थापित करने और उनके प्राकृतिक आवासों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने नौरादेही क्षेत्र में चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बालाघाट क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के प्रयास जारी हैं और वे पिछले पांच महीनों में चौथी बार जिले के दौरे पर आए हैं।
वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय विकास पर भी जोर
सुपखार में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना केवल एक प्रजाति को फिर से बसाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। जंगली भैंसों के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त भोजन और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना इस पहल की सफलता के लिए जरूरी होगा।
आने वाले वर्षों में आठ जंगली भैंसों से शुरू हुई यह पहल कितनी बड़ी आबादी का रूप लेती है, इस पर वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग की निगरानी रहेगी। तीन वर्षों में 50 भैंसों को बसाने का लक्ष्य पूरा होने पर मध्य प्रदेश में इस प्रजाति के संरक्षण को नई दिशा मिल सकती है।
