'टाइगर स्टेट' में असुरक्षित बाघ : तीन माह में 18 बाघों की मौत, सुरक्षा व निगरानी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
मप्र में तीन माह में 18 बाघों की मौत ने 'टाइगर स्टेट' के दर्जे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ...और पढ़ें

उमरिया में वन विकास निगम के जंगल के निकट मिला बाघ का सड़ा-गला शव।

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। देश में ‘टाइगर स्टेट’ के रूप में पहचान रखने वाले मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2022 की गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ हैं, जो देश की कुल संख्या का 21.38 प्रतिशत हैं। लेकिन वर्ष 2026 की शुरुआत के पहले तीन महीनों में ही 18 बाघों की मौत ने हालात चिंताजनक बना दिए हैं।
लगातार हो रही मौतें
7 जनवरी से 6 अप्रैल के बीच हुई इन 18 मौतों का आंकड़ा कुल बाघ आबादी का लगभग 2.30 प्रतिशत है। तुलना करें तो देशभर में इसी अवधि में 46 बाघों की मौत हुई है, जो कुल संख्या का 1.29 प्रतिशत है—यानी मध्य प्रदेश में स्थिति ज्यादा गंभीर नजर आ रही है।
पिछले वर्ष भी प्रदेश में 55 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। लगातार बढ़ते आंकड़ों ने प्रदेश के ‘टाइगर स्टेट’ के दर्जे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देर से मिल रहे शव, मॉनिटरिंग पर सवाल
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अधिकांश मामलों में बाघों के शव एक सप्ताह या उससे अधिक समय बाद मिल रहे हैं। हाल ही में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में एक बाघ का शव 23 दिन बाद मिला।
इसी तरह उमरिया के वन विकास निगम के चंदिया रेंज के जंगल से लगे राजस्व सीमा में सोमवार को एक बाघ का शव मिला है, जो एक से दो सप्ताह पुराना है। कान्हा में भी रविवार को एक बाघिन का शव मिला है। यह स्थिति वन्यजीवों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
शिकार और करंट से मौतें बढ़ीं
इस साल हुई 18 मौतों में से आधे से ज्यादा मामले शिकार या मानवजनित कारणों से जुड़े हैं। छिंदवाड़ा के तामिया में रेडियो कॉलर लगे बाघ का शिकार होना सबसे चौंकाने वाला मामला रहा। वहीं उमरिया में दो बाघों की करंट लगने से मौत हुई, जबकि चंदिया में मिला शव भी शिकार से जुड़ा बताया जा रहा है।
प्रदेश में अब तक हुई 18 मौतों में से 6 अकेले उमरिया जिले में दर्ज की गई हैं, जो इस क्षेत्र को सबसे संवेदनशील बनाता है।
सरकारी दावे बनाम जमीनी हकीकत
हालांकि प्रधान मुख्य वन संरक्षक की 21 जनवरी की रिपोर्ट में कहा गया था कि प्रदेश में बाघों की मृत्यु दर नियंत्रित है, लेकिन ताजा आंकड़े इस दावे को चुनौती देते नजर आ रहे हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यदि समय रहते निगरानी और सुरक्षा तंत्र को मजबूत नहीं किया गया, तो मध्य प्रदेश के ‘टाइगर स्टेट’ का गौरव खतरे में पड़ सकता है।
