सतपुड़ा रिजर्व में चार माह के बाघ शावक की मौत, नौ माह में पांचवी घटना से बढ़ी चिंता, वनकर्मी बोले- सुनी थी बाघों की दहाड़
नर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में चार माह के बाघ शावक का शव मिला, जिससे वन विभाग में हड़कंप मच ...और पढ़ें

एसटीआर में मिला बाघ शावक का शव (सौजन्य- पार्क प्रबंधन)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। नर्मदापुरम जिले में स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के मटकुली रेंज स्थित नयाखेड़ा क्षेत्र में चार माह के बाघ शावक का शव मिलने से वन अमले में हड़कंप मच गया। शनिवार रात जंगल में बाघों की दहाड़ सुनाई देने के बाद शुरू की गई सर्चिंग के दौरान यह शव बरामद हुआ। रविवार को वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और नियमानुसार कार्रवाई पूरी की गई।
क्षेत्र संचालक, सहायक संचालक (पिपरिया-पचमढ़ी), तहसीलदार पिपरिया और एनटीसीए प्रतिनिधि की मौजूदगी में पंचनामा व पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। शव परीक्षण एसटीआर के डॉ. गुरुदत्त शर्मा और रातापानी टाइगर रिजर्व के डॉ. अमित ओढ़ की टीम ने किया, जिसके बाद शावक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पगमार्क और घावों से संघर्ष के संकेत
घटनास्थल नयाखेड़ा बीट के कक्ष क्रमांक 460 के आसपास नर और मादा बाघ के पगमार्क मिले हैं। शावक के शरीर पर गहरे घाव भी पाए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया यह मामला बाघों के आपसी संघर्ष का माना जा रहा है। वनरक्षकों ने शनिवार देर शाम इसी क्षेत्र में दो बाघों की तेज दहाड़ भी सुनी थी।
नौ महीने में पांचवीं मौत
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और आसपास के वन क्षेत्रों में पिछले नौ महीनों में बाघों की मौत की यह पांचवीं घटना है। इससे पहले मढ़ई में एक बाघ, चूरना में संदिग्ध हालात में दूसरा बाघ, तवा नगर में बीमारी से एक बाघिन और हाल ही में छिंदवाड़ा के छातीआम क्षेत्र में शिकार कर बाघ को दफनाने का मामला सामने आ चुका है।
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वन्यजीव सुरक्षा पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही घटनाओं ने वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों—जैसे मछली पकड़ना और लकड़ी कटाई के लिए लोगों की आवाजाही बढ़ रही है, जिससे वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास और उनकी सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ रहे हैं।
शावक के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं और मौत किसी मांसाहारी वन्यजीव के हमले से होना प्रतीत होती है। वहीं पदचिह्नों के आधार पर प्रथमदृष्टया में यह मामला बाघों के आपसी संघर्ष का लग रहा है।
- राखी नंदा, क्षेत्र संचालक, एसटीआर
