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'जहर नहीं, करंट से हुई थी STR के बाघ की मौत', आरोपितों का चौंकाने वाला खुलासा

Published: Sun, 05 Apr 2026 03:53 PM (IST)

छिंदवाड़ा के तामिया में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के एक बाघ की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पहले ...और पढ़ें

बाघ की मौत (प्रतीकात्मक चित्र)

बाघ की मौत (प्रतीकात्मक चित्र)

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संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, भोपाल। छिंदवाड़ा जिले के तामिया क्षेत्र स्थित छातीआम गांव में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के कॉलर आईडी वाले बाघ की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में जहां जहर से मौत की बात सामने आई थी, वहीं अब आरोपितों ने स्वीकार किया है कि बाघ की मौत करंट लगने से हुई थी।

वन विभाग की पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि अफीम की अवैध खेती की सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर बिजली के तार बिछाए गए थे। इसी करंट की चपेट में आने से बाघ की जान गई। इस मामले में वन विभाग ने छातीआम गांव के उदेसिंग समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।

पहले जहर से मौत की बनी थी थ्योरी

शुरुआती जांच में यह माना गया था कि खेत में पड़े मृत बैल के शव पर यूरिया डाल दिया गया था, जिसे खाने के बाद बाघ की मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इसी बात का उल्लेख किया गया था।

आरोपितों के बयान से बदली कहानी

हालांकि, वन अधिनियम की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों में आरोपितों ने साफ कहा कि बाघ की मौत यूरिया से नहीं, बल्कि खेत में फैले करंट से हुई। यह बयान तामिया एसडीओ सीमा ठाकुर द्वारा दर्ज किए गए हैं, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल

आरोपितों के इस खुलासे के बाद वन विभाग के दावों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने भी मामले में गंभीर लापरवाही की आशंका जताई है।

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23 दिन तक क्यों नहीं हुई मॉनिटरिंग?

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने सवाल उठाया कि बाघ के रेडियो कॉलर से तीन मार्च के बाद कोई हलचल नहीं मिल रही थी, फिर भी 23 दिनों तक मॉनिटरिंग टीम ने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से पिछले 30 दिनों के मॉनिटरिंग लॉग का ऑडिट कराने की मांग की है।

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आरोपितों के बयान लिए गए हैं। आरोपितों ने यह स्वीकार किया है कि करंट लगने से बाघ की मौत हुई। अभी इस मामले की जांच जारी है।
- साहिल गर्ग, डीएफओ, छिंदवाड़ा पश्चिम