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राज्यसभा चुनाव पर कानूनी घमासान: भाजपा के तीन सदस्यों को MP हाई कोर्ट की आखिरी मोहलत, जवाब नहीं दिया तो पक्ष रखने का अधिकार खत्म

Published: Thu, 05 Nov 2026 06:34 PM (IST)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव याचिका में भाजपा के तीन सदस्यों को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर ...और पढ़ें

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HighLights

  1. भाजपा के तीन राज्यसभा सदस्यों को अंतिम अवसर।

  2. मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा निर्वाचन को दी चुनौती।

  3. जवाब न देने पर पक्ष रखने का अधिकार समाप्त।

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका में भाजपा के तीन सदस्यों को जवाब पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय में जवाब दाखिल नहीं करने पर उनका लिखित पक्ष रखने का अधिकार समाप्त किया जा सकता है। न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकलपीठ ने यह निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को तय की है।

यह चुनाव याचिका कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने दायर की है। इसमें भाजपा के राज्यसभा सदस्य महेश केवट के निर्वाचन को चुनौती दी गई है। साथ ही याचिकाकर्ता ने अपना नामांकन निरस्त किए जाने की निर्वाचन प्रक्रिया को भी अनुचित बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।

महेश केवट संग तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल भी प्रतिवादी

मीनाक्षी नटराजन ने अपनी याचिका में महेश केवट के अलावा उसी निर्वाचन प्रक्रिया में निर्विरोध चुने गए भाजपा के अन्य दो सदस्यों तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को भी प्रतिवादी बनाया है। तीनों का निर्वाचन निर्विरोध हुआ था।

विवाद की शुरुआत नामांकन पत्रों की जांच के दौरान हुई थी। निर्वाचन अधिकारी ने तेलंगाना में लंबित आपराधिक शिकायत से संबंधित जानकारी नामांकन के साथ दाखिल शपथपत्र में नहीं देने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने दी थी चुनाव याचिका दायर करने की छूट

नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले को मीनाक्षी नटराजन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, 12 जून को शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनाव याचिका दाखिल कर निर्वाचन को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी थी।

इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया और राज्यसभा निर्वाचन प्रक्रिया तथा महेश केवट के निर्वाचन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की।

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निर्वाचन आयोग के नाम हटाने के आवेदन पर अलग से होगा फैसला

सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सेठ ने अदालत को बताया कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नाम प्रकरण से हटाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा को व्यक्तिगत रूप से पक्षकार बनाया गया है। ऐसे में वे अपना व्यक्तिगत जवाब प्रस्तुत करेंगे।

इस पर एकलपीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी का नाम हटाने संबंधी आवेदन पर अलग से आदेश पारित किया जाएगा।

अब 27 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा के तीनों प्रतिवादियों की ओर से जवाब दाखिल किया गया है या नहीं। हाई कोर्ट ने फिलहाल उन्हें अपना पक्ष रखने का अंतिम अवसर दिया है।

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