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'मध्य प्रदेश में धान घोटाले में 90 FIR दर्ज की गई', EOW ने हाई कोर्ट में बताया

Published: Sat, 03 Oct 2026 12:44 PM (IST)

मध्य प्रदेश पुलिस की ईओडब्ल्यू ने राज्य में धान खरीद और परिवहन में अनियमितताओं को लेकर 90 एफआईआर दर्ज की ...और पढ़ें

(यह तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने राज्यभर में धान खरीद और परिवहन में अनियमितताओं को लेकर 90 एफआईआर दर्ज की हैं।

एजेंसी ने बुधवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को यह जानकारी दी। अदालत के निर्देशानुसार ईओडब्ल्यू ने सभी मामलों में चल रही जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी पेश की।

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की खंडपीठ के समक्ष रिपोर्ट रखे जाने के बाद राज्य सरकार और मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह के लिए टाल दी।

ऑटो और दोपहिया वाहनों पर धान ढोने का फर्जीवाड़ा

जबलपुर स्थित नागरिक उपभोक्ता मंच द्वारा दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा कराई गई जांच में जिले में करीब 34 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ था।

याचिका के अनुसार धान खरीद और परिवहन के दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया, जिसमें 10 से लेकर 200 क्विंटल तक धान की खेप को दोपहिया वाहनों, ऑटो-रिक्शा और यात्री बसों के जरिए ढोया जाना दर्शाया गया था।

27 जिलों में जांच के निर्देश

याचिकाकर्ता संगठन ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यह घोटाला केवल जबलपुर तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने संदिग्ध धान घोटाले की जांच के लिए 27 जिलों के कलेक्टर्स को निर्देश दिए थे, लेकिन कई जगहों पर इस जांच के आधार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

संगठन ने आरोप लगाया कि वास्तविक स्तर पर गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कदम उठाने की बजाय मामले को दबाने की कोशिश की जा रही थी।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद आगे की कार्रवाई

उच्च न्यायालय ने पूर्व में राज्यभर के कलेक्टर्स को इसी तरह की जांच कराने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा अदालत ने सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन को जबलपुर में सामने आई गड़बड़ियों पर की गई कार्रवाई का हलफनामा पेश करने और ईओडब्ल्यू को दर्ज मामलों की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।

अब सरकार और संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत जवाब सौंपे जाने के बाद अदालत छह सप्ताह बाद मामले की अगली सुनवाई करेगी।

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