120 साल पुराना दस्तावेज ने जगाई मध्य प्रदेश के भांडेर के लिए उम्मीद, शुरू हुआ 'रेल लाओ अभियान'
दतिया के भांडेर में 120 साल पुराने रेलवे गजट से नई रेल कनेक्टिविटी की उम्मीद जगी है। यह दस्तावेज झांसी-भिंड ...और पढ़ें
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मध्य प्रदेश के भांडेर के लिए नई रेल उम्मीद (एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)
HighLights
120 साल पुराने रेलवे गजट से भांडेर में उम्मीद जगी।
दस्तावेज में झांसी-भिंड रेल लाइन का प्रस्ताव है।
'रेल लाओ अभियान' को स्थानीय लोगों का समर्थन मिला।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। समय की धूल में दबा 120 साल पुराना एक पीला पड़ चुका कागज मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर में नई रेल कनेक्टिविटी की उम्मीद जगा रहा है।
ग्वालियर रियासत के समय के 1905-06 के रेलवे गजट में उल्लेखित और 1996 के री-प्रिंट में सहेजा गया यह पुराना दस्तावेज अब स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के लिए एक बड़े जन-आंदोलन का आधार बन गया है, जिससे क्षेत्र में विकास और व्यापार के नए दरवाजे खुलने की उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला और कैसे मिला दस्तावेज?
बता दें कि यह पुराना और जर्जर दस्तावेज पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक केसरी चौधरी के पास मौजूद कागजों में से मिला है। उन्होंने बताया कि 1996 में विधानसभा में एक सवाल उठाते समय उन्हें यह पुराना गजट मिला था। इस दस्तावेज में स्पष्ट रूप से झांसी और भिंड के बीच एक नई रेलवे लाइन बिछाने का प्रस्ताव दर्ज है, जो भांडेर से होकर गुजरती है।
क्यों उठी रेलवे लाइन की मांग?
इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि इस पुरानी खोज के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर 'रेल लाओ अभियान' शुरू हो गया है, जिसे नागरिकों, व्यापारियों और युवाओं का भारी समर्थन मिल रहा है।
इसका बड़ा कारण यह है कि भांडेर एक तेजी से बढ़ता हुआ शहर है और इसके आसपास कई धार्मिक स्थल हैं। यहां हर महीने 20000 से 25000 श्रद्धालु आते हैं, लेकिन सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त साधन न होने के कारण शाम 4:30 बजे के बाद बाहर जाने के लिए निजी वाहनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
अब इसका व्यापारिक लाभ भी समझिए
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, भांडेर एक प्रमुख खाद्यान्न भंडारण केंद्र है, लेकिन रेलवे लोडिंग सुविधा न होने के कारण व्यापार प्रभावित होता है। यदि यहां रेलवे सुविधा मिल जाए, तो अकेले रेलवे को सालाना 25 से 50 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता है।
स्थानीय लोग का रुख क्या है?
गौरतलब है कि इस अभियान को पूरी तरह से गैर-राजनीतिक रखा गया है। सोशल मीडिया और ग्रामीण स्तर पर चलाए जा रहे इस जन-अभियान से 800 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।
अभियान से जुड़े लोग अब इस पुरानी योजना को लेकर स्थानीय सांसद भिंड लोकसभा क्षेत्र से संध्या राय से मुलाकात कर अपनी मांग पुरजोर तरीके से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
